मराठा आरक्षण पर रामदास आठवले का फॉर्मूला क्या है? सूखे से लेकर अभिजीत दीपके तक पर रखी बात

राहुल गुप्ता

नवी मुंबई, 3 अक्टूबर। महाराष्ट्र में सूखे और मराठा आरक्षण के मुद्दे पर केंद्रीय सामाजिक न्याय राज्यमंत्री रामदास आठवले ने अपनी भूमिका स्पष्ट की है। नवी मुंबई के वाशी में रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के 69वें स्थापना दिवस के कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि गरीब मराठा समुदाय को आरक्षण मिलना चाहिए, लेकिन पूरे मराठा समाज को एक साथ ओबीसी आरक्षण देना उचित नहीं होगा। उन्होंने सूखाग्रस्त किसानों के लिए सरकारी राहत का लाभ पहुंचाने और आरपीआई कार्यकर्ताओं से मदद के लिए मैदान में उतरने की अपील भी की।

पुराने रिकॉर्ड वाले मराठों को ओबीसी लाभ की बात

रामदास आठवले ने कहा कि जिन मराठा परिवारों के पुराने रिकॉर्ड ओबीसी श्रेणी से जुड़े हैं, उन्हें उपलब्ध दस्तावेज और कानूनी पात्रता के आधार पर ओबीसी आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए। वहीं, जिन गरीब मराठा परिवारों के पास ओबीसी से संबंधित रिकॉर्ड नहीं हैं, उनके लिए अलग आरक्षण देने की भूमिका का उन्होंने समर्थन किया।

उन्होंने कहा कि मराठा आरक्षण के आंदोलन से गरीब मराठा समुदाय के आरक्षण का मुद्दा प्रमुखता से सामने आया है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि मराठा आरक्षण देते समय ओबीसी समुदाय के मौजूदा आरक्षण अधिकारों पर असर नहीं पड़ना चाहिए।

सूखे को लेकर सरकार से मदद की अपील

आठवले ने कहा कि राज्य सरकार ने कई तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किया है और इससे प्रभावित लोगों को सरकार की ओर से मिलने वाली राहत और रियायतों का लाभ मिलेगा। उन्होंने आरपीआई कार्यकर्ताओं से भी सूखाग्रस्त किसानों और मजदूरों की मदद के लिए प्रत्यक्ष रूप से काम करने का आह्वान किया।

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इससे पहले भी आठवले महाराष्ट्र के सूखे को लेकर किसानों और खेत मजदूरों को तत्काल सहायता देने, किसानों के बिजली बिल माफ करने तथा केंद्र से मदद दिलाने की मांग कर चुके हैं।

अभिजीत दीपके के बयान पर जताई आपत्ति

कार्यक्रम के दौरान आठवले ने कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके के बयानों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के खिलाफ कथित आपत्तिजनक या अनादरपूर्ण भाषा के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई।

आठवले ने दीपके के उस कथित बयान पर भी सवाल उठाया, जिसमें पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा डॉ. आंबेडकर को आगे बढ़ाने की बात कही गई थी। उन्होंने दीपके से इस तरह की बयानबाजी बंद करने और माफी मांगने की मांग की है। यह प्रतिक्रिया दीपके के 2 अक्टूबर के आंदोलन और उसमें दिए गए बयानों के बाद सामने आई है।

हालांकि, दीपके और उनके संगठन की ओर से इन आरोपों और आठवले की आलोचना पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। राजनीतिक बयानबाजी के बीच मराठा आरक्षण, ओबीसी अधिकार और सूखे से प्रभावित किसानों को राहत का मुद्दा राज्य की राजनीति में चर्चा में बना हुआ है।

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