सरकारी और अर्ध-सरकारी संस्थानों की बैठकों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, सम्मेलनों और कैंटीन में पौष्टिक भोजन को दी जाएगी प्राथमिकता, फल, उबले अंडे, पोहा, इडली-सांभर और स्थानीय अनाज होंगे मेन्यू का हिस्सा
न्यूज़म ब्यूरो
मुंबई, 3 सितंबर। महाराष्ट्र सरकार ने सरकारी बैठकों और कार्यक्रमों में परोसे जाने वाले नाश्ते और भोजन को लेकर बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है। अब सरकारी और अर्ध-सरकारी संस्थानों की बैठकों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, सम्मेलनों और कैंटीन में तले-भुने और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों की जगह पौष्टिक और संतुलित भोजन को प्राथमिकता दी जाएगी। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस नीति को मंजूरी दी है।
नई व्यवस्था के तहत मौसमी फलों के साथ केला, सेब, अमरूद और पपीता, उबले अंडे, उबली दालें, पोहा और इडली-सांभर जैसे विकल्प मेन्यू में शामिल किए जाएंगे। इसके अलावा मांग के अनुसार गर्म दूध, शुगर-फ्री ग्रीन टी और छाछ उपलब्ध कराने का भी सुझाव दिया गया है।
वड़ा पाव, समोसा और पकौड़े पर कटौती
सरकार का जोर बैठकों में मिलने वाले पारंपरिक तले-भुने नाश्ते की मात्रा कम करने पर है। वड़ा पाव, समोसा, कचौरी, पकौड़े, कटलेट और बिस्किट जैसे अधिक तेल या अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों की जगह फल, सलाद, दालें और स्थानीय पौष्टिक खाद्य पदार्थों को बढ़ावा दिया जाएगा। हालांकि, इसे सभी चीजों पर तत्काल पूर्ण प्रतिबंध के तौर पर नहीं, बल्कि सरकारी खान-पान व्यवस्था में स्वस्थ विकल्पों को प्राथमिकता देने की नीति के रूप में देखा जा रहा है।
नाचनी, ज्वार और बाजरे को भी जगह
सरकार ने स्थानीय और पारंपरिक अनाज को भी मेन्यू में शामिल करने पर जोर दिया है। नाचनी, ज्वार और बाजरे की भाकरी जैसे विकल्पों के साथ उसल, दाल, हरी सब्जियां, पत्तेदार सब्जियां, सलाद, छाछ और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों को भोजन का हिस्सा बनाने की सिफारिश की गई है।
नए कैटरिंग कॉन्ट्रैक्ट में हेल्दी मेन्यू जरूरी
इस फैसले का असर केवल मंत्रालय की कैंटीन तक सीमित नहीं रहेगा। सरकारी विभागों और संस्थानों के नए कैटरिंग कॉन्ट्रैक्ट में हेल्दी और संतुलित मेन्यू से जुड़े प्रावधान शामिल करना जरूरी किया जाएगा। साथ ही कर्मचारियों को स्वस्थ खान-पान के प्रति जागरूक करने के लिए कार्यक्रम आयोजित करने और उनकी स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखकर मेन्यू तैयार करने पर भी जोर दिया गया है। मेन्यू तैयार करते समय भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय पोषण संस्थान (आईसीएमआर-एनआईएन) के दिशा-निर्देशों का संदर्भ लेने की बात कही गई है।
मंत्रालय की कैंटीन से शुरू हो चुका बदलाव
मंत्रालय की कैंटीन में इस दिशा में पहले से ही कई बदलाव किए जा चुके हैं। फल, उबले अंडे, उबली दालें, पोहा, इडली-सांभर, गर्म दूध और ग्रीन टी जैसे विकल्प उपलब्ध कराए जा रहे हैं। अब इसी सोच को सरकारी और अर्ध-सरकारी संस्थानों की बैठकों, कार्यक्रमों और कैंटीन तक विस्तार देने की तैयारी है।
मुंढे की मुहिम से जोड़ा जा रहा बदलाव
महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) आयुक्त तुकाराम मुंढे की खाद्य सुरक्षा और स्वस्थ खान-पान को लेकर चल रही सख्त मुहिम के बीच सरकार का यह फैसला चर्चा में है। मुंढे लगातार ज्यादा वसा, नमक और चीनी वाले खाद्य पदार्थों के अत्यधिक सेवन से बचने और खाद्य सुरक्षा मानकों के पालन पर जोर दे रहे हैं। ऐसे में सरकारी बैठकों और कैंटीन के मेन्यू में बदलाव को उनकी व्यापक खाद्य सुरक्षा मुहिम की पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है।
सरकार का तर्क है कि सरकारी कर्मचारियों के रोजमर्रा के खान-पान में पौष्टिक विकल्प शामिल करने से स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा मिलेगा और तले-भुने तथा अत्यधिक प्रोसेस्ड भोजन पर निर्भरता कम की जा सकेगी। अब देखना होगा कि मंत्रालय से शुरू हुई यह हेल्दी मेन्यू पहल राज्यभर के सरकारी संस्थानों में कितने प्रभावी तरीके से लागू होती है।
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