न्यूज़म ब्यूरो
मुंबई, 1 सितंबर।
एस्सेल ग्रुप के संस्थापक सुभाष चंद्रा को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) से मंगलवार को बड़ा झटका लगा है। NCLT की पांच सदस्यीय बेंच ने 25 अगस्त के उस फैसले पर रोक लगा दी, जिसमें चंद्रा को करीब 22,006 करोड़ रुपये के कर्ज के बदले सिर्फ 6.25 करोड़ रुपये देकर मामला खत्म करने की मंजूरी दी गई थी। अब ट्रिब्यूनल ने सभी पक्षों को नोटिस जारी कर मामले की दोबारा सुनवाई करने का फैसला किया है।
क्या है पूरा मामला?
सुभाष चंद्रा के खिलाफ 2024 में इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस की शिकायत पर कार्रवाई शुरू हुई थी। यह मामला एस्सेल ग्रुप की कंपनियों के कर्ज के लिए चंद्रा की ओर से दी गई गारंटी से जुड़ा है। 25 अगस्त को NCLT ने एक योजना को मंजूरी दी थी, जिसके तहत करीब 22,006 करोड़ रुपये के कर्ज के बदले बैंकों और अन्य कर्जदाताओं को केवल 6.25 करोड़ रुपये दिए जाने थे। कई कर्जदाताओं ने इस फैसले का विरोध किया था।
कर्जदाताओं ने क्यों जताई आपत्ति?
कर्जदाताओं का कहना था कि उन्हें मिलने वाली रकम बहुत कम है। कुछ बैंकों ने यह सवाल भी उठाया कि योजना का समर्थन करने वाले कुछ कर्जदाता चंद्रा से जुड़ी संस्थाओं से संबंधित हो सकते हैं। उन्होंने चंद्रा की संपत्तियों की जांच कराने की मांग भी की।
मामला इसलिए भी पेचीदा है क्योंकि 2017 और 2018 में चंद्रा की संपत्ति हजारों करोड़ रुपये बताई गई थी, जबकि इस मामले में उनकी मौजूदा संपत्ति करीब 31.79 करोड़ रुपये दर्ज की गई है।
किन बैंकों का कितना पैसा फंसा?
इस मामले में कई बड़े बैंकों और वित्तीय संस्थानों का पैसा जुड़ा है। एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस का करीब 1,322 करोड़ रुपये, एचडीएफसी बैंक का 775 करोड़ रुपये और फ्रैंकलिन टेम्पलटन का 729 करोड़ रुपये फंसा बताया गया है।
इसके अलावा एडलवाइस का करीब 565 करोड़ रुपये, केनरा बैंक का 348 करोड़ रुपये, इंडसइंड बैंक का 240 करोड़ रुपये और यूनियन बैंक का 164 करोड़ रुपये का पैसा जुड़ा है। अब मामले की दोबारा सुनवाई के बाद आगे की तस्वीर साफ होगी।
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