हिंदी विश्वविद्यालय में 6 दलित-बहुजन छात्रों का निष्कासन

प्रकाश आंबेडकर ने प्रशासन पर साधा निशाना

रीमा सिंह

वर्धा, 8 सितंबर।

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा में मेस और छात्रावास की सुविधाओं में सुधार की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे छह दलित-बहुजन छात्रों को विश्वविद्यालय से निष्कासित किए जाने का मामला सामने आया है। निष्कासन के बाद छात्र 3 सितंबर से विश्वविद्यालय परिसर के बाहर धरने पर बैठे हैं।

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इस मामले को लेकर वंचित बहुजन आघाड़ी (VBA) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट प्रकाश आंबेडकर ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन छात्रों की जायज मांगों को सुनने के बजाय उनके खिलाफ दमनात्मक कार्रवाई कर रहा है।

आंबेडकर ने कहा कि छात्रों की मांगें मेस में बेहतर भोजन, छात्रावास की सुविधाओं में सुधार और प्रशासन की कथित लापरवाही से जुड़ी थीं। उनका आरोप है कि इन बुनियादी सुविधाओं और अधिकारों को लेकर आवाज उठाने वाले छात्रों के खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई गई और उन्हें हॉस्टल से निष्कासित कर दिया गया।
उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए इसे ‘ब्राह्मणवादी और मनुवादी मानसिकता’ से प्रभावित बताया।

आंबेडकर ने कहा कि छात्रों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय उन्हें दंडित करना उनके अधिकारों को दबाने का प्रयास है। वंचित बहुजन आघाड़ी और उसके छात्र संगठन ‘सम्यक विद्यार्थी आंदोलन’ ने निष्कासित छात्रों को अपना समर्थन दिया है। आंबेडकर ने कहा कि संगठन छात्रों के संघर्ष में उनके साथ खड़ा रहेगा और उन्हें आवश्यक कानूनी सहायता उपलब्ध कराएगा। उन्होंने छात्रों की आवाज दबाने की किसी भी कोशिश का विरोध करने की बात कही।

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