कम उम्र में दिल से जुड़ी समस्याओं को लेकर विशेषज्ञ लगातार सावधान कर रहे हैं
पहले हार्ट अटैक को अधिक उम्र से जोड़कर देखा जाता था
न्यूज़म ब्यूरो
मुंबई, 9 सितंबर | कम उम्र में Heart Attack का जोखिम नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। तंबाकू, वेपिंग, तनाव, नींद की कमी, खराब खान-पान और शारीरिक गतिविधि की कमी दिल की सेहत प्रभावित कर सकती है। जानें 40 साल से कम उम्र में हृदय रोग का खतरा किन कारणों से बढ़ सकता है, किन लोगों को कम उम्र में कोलेस्ट्रॉल और अन्य स्वास्थ्य जांच करानी चाहिए। सीने में दर्द, भारीपन, सांस लेने में परेशानी, ज्यादा पसीना, चक्कर और असामान्य थकान जैसे संकेतों को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार नियमित व्यायाम, संतुलित भोजन, पर्याप्त नींद और तनाव नियंत्रण दिल की सेहत के लिए महत्वपूर्ण हैं।
Heart Attack : 40 साल से कम उम्र में क्यों बढ़ रहा जोखिम
कम उम्र होने का मतलब यह नहीं है कि दिल की बीमारी का खतरा नहीं होगा। 20 या 30 साल का व्यक्ति बाहर से पूरी तरह स्वस्थ दिखाई दे सकता है। फिर भी उसमें उच्च रक्तचाप या बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल हो सकता है। डायबिटीज और पारिवारिक इतिहास भी जोखिम बढ़ा सकते हैं।
इनमें से कुछ समस्याएं लंबे समय तक बिना स्पष्ट लक्षणों के रह सकती हैं। इसलिए युवाओं को नियमित स्वास्थ्य जांच पर ध्यान देना चाहिए। जांच के लिए केवल 40 या 50 साल की उम्र तक इंतजार नहीं करना चाहिए।
तंबाकू और वेपिंग से बढ़ सकता है खतरा
धूम्रपान दिल की बीमारी के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल है। वेपिंग को भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जाता है। निकोटीन दिल की धड़कन और रक्तचाप को प्रभावित कर सकता है।
लंबे समय तक निकोटीन का सेवन रक्त वाहिकाओं पर भी असर डाल सकता है। व्यायाम की कमी और खराब खान-पान से यह जोखिम बढ़ सकता है।
तनाव और नींद भी हैं महत्वपूर्ण
लगातार तनाव शरीर पर कई तरह से असर डाल सकता है। लंबे समय तक तनाव रहने से दिल की सेहत भी प्रभावित हो सकती है। पर्याप्त नींद नहीं लेने से रक्तचाप और वजन से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
युवाओं को नियमित शारीरिक गतिविधि को दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए। पैदल चलना, व्यायाम और खेल इसमें मददगार हो सकते हैं। योग और ध्यान तनाव कम करने में उपयोगी हो सकते हैं।
कम उम्र में कोलेस्ट्रॉल की जांच जरूरी
कोलेस्ट्रॉल की जांच के लिए अधिक उम्र का इंतजार करना जरूरी नहीं है। मोटापा, डायबिटीज और उच्च रक्तचाप वाले लोगों को विशेष ध्यान देना चाहिए। धूम्रपान करने वालों को भी नियमित जांच करानी चाहिए।
परिवार में कम उम्र में हृदय रोग का इतिहास होने पर सावधानी बढ़ जाती है। समय पर जांच से जोखिम का पता जल्दी लगाया जा सकता है। डॉक्टर जरूरत के अनुसार जीवनशैली में बदलाव या उपचार की सलाह दे सकते हैं।
इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें
सीने में दर्द या भारीपन गंभीर संकेत हो सकता है। सांस लेने में परेशानी भी चेतावनी का संकेत हो सकती है। अचानक ज्यादा पसीना, चक्कर या जी मिचलाना भी हो सकता है।
असामान्य थकान को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। पीठ, गर्दन या जबड़े में दर्द भी कुछ मामलों में दिखाई दे सकता है। लक्षण अचानक और गंभीर हों तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें।
कम उम्र से दिल की सेहत पर दें ध्यान
युवाओं को तंबाकू और निकोटीन से दूरी बनानी चाहिए। नियमित व्यायाम और संतुलित भोजन को जीवनशैली में शामिल करें। पर्याप्त नींद लेना और तनाव कम करना भी जरूरी है।
रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल और रक्त शर्करा की समय-समय पर जांच कराएं। परिवार में हृदय रोग का इतिहास हो तो डॉक्टर से सलाह लें। कम उम्र में सावधानी भविष्य के जोखिम को कम करने में मदद कर सकती है।
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