अंधेरी पुलिस ने 10 आरोपियों को किया गिरफ्तार, आयकर विभाग के दो कर्मचारी भी शामिल
न्यूज़म ब्यूरो
मुंबई, 10 सितंबर।मुंबई अंधेरी में आयकर विभाग और क्राइम ब्रांच के अधिकारी बनकर एक कारोबारी के कार्यालय में कथित तौर पर फर्जी छापा मारकर एक करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने के मामले में अंधेरी पुलिस ने 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में आयकर विभाग में कार्यरत बताए जा रहे एक आयकर निरीक्षक और एक कर सहायक भी शामिल हैं।
पुलिस के अनुसार, मामले की शिकायत 49 वर्षीय राजकुमार कन्डासमी ने की थी। जांच में सामने आया कि कन्डासमी के यहां पहले संतोष उदय खोपटकर ड्राइवर के रूप में काम करता था। नौकरी से निकाले जाने के बाद संतोष और कन्डासमी के बीच वेतन को लेकर विवाद चल रहा था। पुलिस को संदेह है कि इसी विवाद के चलते संतोष ने अपने साथियों के साथ मिलकर कथित तौर पर यह साजिश रची।फर्जी पहचान पत्र दिखाकर ऑफिस में प्रवेश
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने आयकर विभाग और क्राइम ब्रांच के अधिकारी-कर्मचारी होने का दावा करते हुए कन्डासमी के कार्यालय में प्रवेश किया। आरोप है कि इस दौरान फर्जी सरकारी पहचान पत्र भी दिखाए गए।
कार्यालय में पहुंचने के बाद आरोपियों ने कारोबारी और उनकी पत्नी को कथित तौर पर अपने कब्जे में रखा। कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों के मोबाइल फोन भी ले लिए गए, ताकि वे किसी से संपर्क न कर सकें।
इसके बाद आरोपियों ने आयकर विभाग की कार्रवाई और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाते हुए कथित तौर पर धमकाया। पुलिस के अनुसार, मामला खत्म करने और कार्रवाई रोकने के नाम पर कारोबारी से एक करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी गई।जांच के बाद 10 गिरफ्तार
शिकायत मिलने के बाद अंधेरी पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस ने तकनीकी जांच और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पहले छह आरोपियों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान संतोष उदय खोपटकर, विनय रमेश मोरे, प्रेम किसन सबनानी, प्रज्ञा हरीश माईन, रेश्मा शामराव वारंग और सबीना हाफीज शेख के रूप में हुई है।
जांच के दौरान पुलिस को कथित साजिश में आयकर विभाग के दो कर्मचारियों की भूमिका की जानकारी मिली। इसके बाद सुरेश महावीरप्रसाद मिश्रा, जिन्हें आयकर निरीक्षक बताया गया है, और सुनिल मनोहर गोरे, जिन्हें कर सहायक बताया गया है, को गिरफ्तार किया गया।
इसके अलावा जितु उर्फ जितेंद्र नामदेव मोरे और अशोक विठोबा शिंदे को भी गिरफ्तार किया गया। इस तरह मामले में अब तक कुल 10 आरोपियों की गिरफ्तारी की गई है।
सरकारी कर्मचारियों की भूमिका से जांच गंभीर
फर्जी सरकारी अधिकारियों के नाम पर छापा मारकर कारोबारी से रंगदारी मांगने के इस मामले में आयकर विभाग से जुड़े दो कर्मचारियों की कथित भूमिका सामने आने से जांच का दायरा बढ़ गया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों ने इसी तरीके से पहले भी किसी अन्य कारोबारी या व्यक्ति को निशाना बनाया था या नहीं।
पुलिस सभी आरोपियों से पूछताछ कर रही है और फर्जी छापे की पूरी साजिश, इसमें शामिल अन्य लोगों तथा आरोपियों के पिछले रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।
हालांकि, आरोपियों पर लगाए गए आरोप जांच के अधीन हैं और अदालत में दोष सिद्ध होने तक उन्हें निर्दोष माना जाएगा।
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