महावितरण के एआई मॉड्यूल ने 50 से अधिक तकनीकी मानकों के आधार पर संदिग्ध कनेक्शनों की पहचान की, 27,964 बिजली चोरी के मामले सामने आए
Rahul Gupta
नागपुर, 11 सितंबर।
नागपुर समेत महाराष्ट्र में बिजली चोरी के खिलाफ कार्रवाई को और प्रभावी बनाने के लिए महावितरण ने अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई की मदद लेनी शुरू कर दी है। राज्यभर में 190 से अधिक विशेष उड़न दस्तों द्वारा बिजली कनेक्शनों की जांच और एआई मॉड्यूल के जरिए किए जा रहे सूक्ष्म विश्लेषण के चलते पिछले तीन महीनों में 66.28 करोड़ रुपये से अधिक की बिजली चोरी का खुलासा हुआ है।
बिजली चोरी और समझौता शुल्क की राशि जमा नहीं करने वाले 289 मामलों में अब तक आपराधिक मामले भी दर्ज किए गए हैं।
ऐसे काम करता है एआई मॉड्यूल
महावितरण ने एआई और मशीन लर्निंग तकनीक की मदद से बिजली चोरी की सटीक भविष्यवाणी करने वाला मॉड्यूल तैयार किया है। यह मॉड्यूल बिजली ग्राहकों और संबंधित क्षेत्रों में बिजली खपत के पुराने आंकड़ों, मांग में अचानक हुई कमी या बढ़ोतरी, मीटर में तकनीकी छेड़छाड़ समेत 50 से अधिक तकनीकी मानकों का 24 घंटे सूक्ष्म विश्लेषण करता है।
जिन ग्राहकों के बिजली इस्तेमाल के पैटर्न में संदिग्ध अंतर पाया जाता है, उन्हें एआई मॉड्यूल ‘हाई रिस्क’ श्रेणी में रखता है। इससे बिजली चोरी की आशंका वाले स्थानों की पहचान कर जांच टीमों को कार्रवाई के लिए सटीक जानकारी मिलती है।
पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन
महाराष्ट्र में बिजली चोरी के खिलाफ कार्रवाई में लापरवाही रोकने के लिए बिजली कनेक्शन की जांच से लेकर बिजली बिल तैयार करने तक की पूरी प्रक्रिया ‘थेफ्ट ट्रैकिंग एंड मॉनिटरिंग सिस्टम’ के जरिए ऑनलाइन कर दी गई है। इसके लिए एक अलग मोबाइल एप भी विकसित किया गया है।
इस व्यवस्था के जरिए बिजली चोरी से जुड़े मामलों की निगरानी और कार्रवाई की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
तीन महीने में 27,964 बिजली चोरी के मामले
महावितरण के नियमित और विशेष दस्तों ने जून से अगस्त के बीच राज्यभर में कुल 27,964 बिजली चोरी के मामले उजागर किए। इनमें छत्रपति संभाजीनगर क्षेत्रीय विभाग में 5,083, कोंकण में 11,083, नागपुर में 5,949 और पुणे क्षेत्रीय विभाग में 5,849 मामले सामने आए।
इन कार्रवाईयों के दौरान सामने आए मामलों में बिजली चोरी की रकम और संबंधित शुल्क की वसूली के साथ-साथ गंभीर मामलों में आपराधिक कार्रवाई भी की जा रही है।
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