ओबीसी को खुली श्रेणी में डालने की कोशिश का आरोप

जातिवार जनगणना में ओबीसी के लिए अलग कॉलम की मांग, राज्यपाल से मिले नाना पटोले

रीमा सिंह

मुंबई, 11 सितंबर।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले ने आरोप लगाया है कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार जातिवार जनगणना के नाम पर ओबीसी समाज के साथ अन्याय करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने मांग की कि देश में चल रही जनगणना प्रक्रिया में ओबीसी समाज के लिए स्वतंत्र कॉलम रखा जाए और प्रत्येक जाति की अलग एवं सटीक आबादी दर्ज की जाए।

राज्यपाल से मुलाकात कर सौंपा ज्ञापन

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पटोले ने शुक्रवार को एक प्रतिनिधिमंडल के साथ राज्यपाल जिष्णुदेव वर्मा से लोकभवन में मुलाकात की और इस संबंध में ज्ञापन सौंपा। मुलाकात के बाद उन्होंने कहा कि कांग्रेस की लगातार मांग के दबाव में केंद्र सरकार ने जातिवार जनगणना कराने की घोषणा की है, लेकिन सरकार की कथनी और करनी में अंतर दिखाई दे रहा है।

जनगणना के सवालों पर उठाए सवाल

पटोले ने दावा किया कि जनगणना के आवेदन में शामिल सवालों में एक प्रश्न ऐसा है, जिससे ओबीसी समाज को खुली श्रेणी में शामिल करने की आशंका पैदा होती है। उन्होंने कहा कि ओबीसी वर्ग में कई जातियां और उपजातियां शामिल हैं तथा अलग-अलग राज्यों में इनके नाम और वर्गीकरण अलग हैं। ऐसे में उनकी वास्तविक स्थिति दर्ज करने के लिए बिहार और तेलंगाना की तर्ज पर जातिवार जनगणना की जानी चाहिए।

ओबीसी की जातिवार आबादी दर्ज करना जरूरी

ज्ञापन में कहा गया कि ओबीसी समाज की जातिवार आबादी, सामाजिक-शैक्षणिक स्थिति, आर्थिक परिस्थितियों और विभिन्न क्षेत्रों में प्रतिनिधित्व की अद्यतन आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। प्रत्येक जाति की अलग जानकारी मिलने से सामाजिक न्याय से जुड़ी नीतियों को अधिक प्रभावी ढंग से तैयार किया जा सकेगा।

आरक्षण और कल्याणकारी योजनाओं में मिलेगी मदद

पटोले के अनुसार, सटीक आंकड़ों के आधार पर आरक्षण, शैक्षणिक सुविधाओं, छात्रवृत्ति, रोजगार, कौशल विकास, आर्थिक महामंडलों की योजनाओं, छात्रावास और स्वरोजगार योजनाओं का बेहतर नियोजन किया जा सकेगा। उन्होंने मांग की कि जनगणना में ओबीसी के लिए अलग कॉलम उपलब्ध कराया जाए।

महाराष्ट्र में सूखा घोषित करने की मांग

पटोले ने विदर्भ, मराठवाड़ा और पश्चिम महाराष्ट्र सहित राज्य के कई हिस्सों में सूखे जैसी स्थिति का दावा करते हुए सरकार से तत्काल सूखा घोषित करने की मांग की। उन्होंने किसानों और खेत मजदूरों को आर्थिक सहायता देने के साथ ही पशुओं के लिए चारा और पानी की व्यवस्था करने की मांग की।

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