अंधेरी पुलिस ने 10 आरोपियों को पकड़ा, इनमें आयकर विभाग का एक निरीक्षक और एक कर सहायक शामिल; एक अन्य अधिकारी की भूमिका भी जांच के दायरे में
Rahul Gupta
मुंबई, 11 सितंबर।
मुंबई की अंधेरी पुलिस ने फिल्म ‘स्पेशल 26’ की तर्ज पर फर्जी आयकर और क्राइम ब्रांच अधिकारी बनकर कारोबारी के घर पहुंचने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया है। आरोप है कि गिरोह ने कारोबारी और उसकी पत्नी को जबरन गाड़ी में बैठाकर उनके बिजनेस परिसर में पहुंचाया, वहां मौजूद 11 कर्मचारियों को बंधक बनाया और कार्रवाई से बचाने के नाम पर 1 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी।
पुलिस ने इस मामले में अब तक 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें आयकर विभाग का एक आयकर निरीक्षक और एक कर सहायक भी शामिल हैं। पुलिस की जांच में आयकर विभाग के एक अन्य अधिकारी की भूमिका भी सामने आने की जानकारी है।
बदला लेने के लिए रची गई कथित साजिश
यह मामला अंधेरी पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया है। शिकायतकर्ता राजकुमार कन्डासमी की उम्र 49 वर्ष है। उनके यहां पहले ड्राइवर के तौर पर काम करने वाले संतोष उदय खोपटकर से विवाद हुआ था। विवाद के बाद राजकुमार ने संतोष को छह महीने का वेतन दिए बिना नौकरी से निकाल दिया था।
पुलिस के मुताबिक, इसी बात से नाराज संतोष ने राजकुमार के बारे में अपने पास मौजूद पुरानी जानकारी का इस्तेमाल किया और अपने छह पुरुष तथा तीन महिला परिचितों के साथ मिलकर कथित फर्जी रेड की साजिश रची।
कारोबारी और पत्नी को जबरन ऑफिस ले गए
आरोप है कि फर्जी आयकर और क्राइम ब्रांच अधिकारी बनकर गिरोह के सदस्य सबसे पहले राजकुमार कन्डासमी के घर पहुंचे। उन्होंने खुद को आयकर विभाग का अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके खिलाफ आयकर विभाग की रेड है।
इसके बाद आरोपियों ने कारोबारी और उनकी पत्नी को कथित तौर पर जबरन गाड़ी में बैठाया और उनके बिजनेस परिसर में ले गए। उस समय वहां कारोबारी के 11 कर्मचारी मौजूद थे। आरोपियों ने खुद को आयकर विभाग और क्राइम ब्रांच का अधिकारी-कर्मचारी बताया और फर्जी सरकारी पहचान पत्र दिखाकर कार्रवाई का माहौल बनाया।
लैंडलाइन के तार काटे, कर्मचारियों को कमरे में बंद किया
बिजनेस परिसर में पहुंचने के बाद आरोपियों ने कथित तौर पर लैंडलाइन फोन के तार काट दिए, ताकि ऑफिस से बाहर किसी तरह का संपर्क न हो सके। इसके बाद कारोबारी, उनकी पत्नी और वहां मौजूद 11 कर्मचारियों के मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिए गए।
आरोप है कि कर्मचारियों को एक कमरे में बंद कर दिया गया और उन्हें बाहर जाने से रोक दिया गया। इसके बाद कारोबारी और उनकी पत्नी को आयकर विभाग की कार्रवाई का डर दिखाकर गाली-गलौज की गई और कार्रवाई से बचाने के नाम पर 1 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी गई।
महिला आरोपियों के व्यवहार से हुआ शक
पुलिस के मुताबिक, वारदात के दौरान कारोबारी को आरोपियों पर शक होने लगा। तीन महिला आरोपियों के बोलचाल और हाव-भाव उसे आयकर विभाग के अधिकारियों जैसे नहीं लगे। उनके व्यवहार और बातचीत के तरीके से कारोबारी को संदेह हुआ कि यह असली आयकर कार्रवाई नहीं है।
इसके बाद मामले की जानकारी पुलिस तक पहुंची और अंधेरी पुलिस ने जांच शुरू की।
50 हजार रुपये में ‘अधिकारी’ बनने का ऑफर
पुलिस की जांच में कथित तौर पर सामने आया कि गिरोह में शामिल दो आयकर अधिकारियों और दो अन्य आरोपियों ने बाकी लोगों को फर्जी रेड में भूमिका निभाने के लिए प्रति व्यक्ति 50 हजार रुपये देने का वादा किया था।
पूरी वारदात के लिए आरोपियों को अलग-अलग भूमिकाएं दी गई थीं। कुछ लोगों को अधिकारी बनना था, जबकि अन्य को कर्मचारियों की भूमिका निभानी थी, ताकि कारोबारी को पूरा ऑपरेशन असली आयकर छापे जैसा लगे।
ठाणे में भी कर चुके हैं फर्जी रेड
पुलिस के मुताबिक, यह इस गिरोह की पहली कथित फर्जी रेड नहीं थी। इससे पहले ठाणे के मानपाड़ा इलाके में भी इसी तरह की एक फर्जी रेड को अंजाम दिया गया था। उस मामले में करीब 25 लाख रुपये की वसूली किए जाने की बात सामने आई थी और बाद में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
अब तक की जांच में पुलिस को इस गिरोह द्वारा इसी तरीके से कई और फर्जी रेड किए जाने की जानकारी मिली है। पुलिस पुराने मामलों को भी खंगाल रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि गिरोह ने कितने लोगों को निशाना बनाया और कितनी रकम वसूली।
आयकर विभाग के एक और अधिकारी पर नजर
इस मामले में आयकर विभाग के एक अन्य अधिकारी की भूमिका भी पुलिस की जांच के दायरे में आने की जानकारी सामने आई है। पुलिस इस अधिकारी की कथित भूमिका और अन्य आरोपियों के साथ उसके संपर्क की जांच कर रही है।
आयकर विभाग के दो कर्मचारी गिरफ्तार
पुलिस की पूछताछ में कथित तौर पर सामने आया कि इस साजिश में आयकर विभाग के दो कर्मचारी भी शामिल थे। इसके बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इस प्रकार है:
- संतोष उदय खोपटकर, 37 वर्ष
- विनय रमेश मोरे, 37 वर्ष
- प्रेम किसन सबनानी, 50 वर्ष
- प्रज्ञा हरीश माईन, 27 वर्ष
- रेश्मा शामराव वारंग, 41 वर्ष
- सबीना हाफीज शेख, 48 वर्ष
- सुरेश महावीरप्रसाद मिश्रा, 57 वर्ष, आयकर निरीक्षक
- सुनिल मनोहर गोरे, 59 वर्ष, कर सहायक
- जितु उर्फ जितेंद्र नामदेव मोरे, 52 वर्ष
- अशोक विठोबा शिंदे, 57 वर्ष
इन धाराओं में दर्ज हुआ मामला
पुलिस ने तकनीकी जांच के आधार पर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मामले में भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 61(2), 204, 205, 333, 140(2), 127(1), 351(2) और 308(4) के तहत केस दर्ज किया गया है।
अंधेरी पुलिस अब पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह ने अब तक कितनी फर्जी रेड कीं, किन-किन कारोबारियों को निशाना बनाया, कितनी रकम वसूली और इस पूरे नेटवर्क में आयकर विभाग के कितने लोगों की भूमिका रही है।
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