माजस-जोगेश्वरी में पुनर्वास के लिए आरक्षित 1,802।75 वर्ग मीटर जमीन को आवासीय क्षेत्र में शामिल करने के प्रस्ताव का विरोध, कांग्रेस नेता अशरफ आजमी ने उठाए सवाल
Rahul Gupta
मुंबई, 12 सितंबर।
मुंबई में परियोजना प्रभावित लोगों के पुनर्वास और पुनर्स्थापन के लिए बड़े पैमाने पर आवास तैयार कर रही बीएमसी की नीति पर सवाल उठने लगे हैं। एक ओर मनपा 33,332 परियोजना प्रभावित लोगों के लिए मकान तैयार करने पर करीब 20,751।67 करोड़ रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर पुनर्वास के लिए आरक्षित जमीन को ही कम करने की कवायद पर विवाद खड़ा हो गया है।
माजस, जोगेश्वरी पूर्व में पुनर्वास और पुनर्स्थापन के लिए आरक्षित 1,802।75 वर्ग मीटर जमीन को आवासीय क्षेत्र में शामिल करने के प्रस्ताव का बीएमसी कांग्रेस के गुट नेता अशरफ आजमी ने विरोध किया है। मनपा में आयोजित पत्रकार परिषद में उन्होंने इम्प्रूवमेंट कमेटी के आइटम नंबर 7 को रद्द करने की मांग करते हुए बीएमसी की भूमि नीति पर सवाल उठाए।
पुनर्वास के लिए निर्धारित जमीन ही घटाने का आरोप
अशरफ आजमी का कहना है कि एक ओर मनपा हजारों करोड़ रुपये खर्च कर परियोजना प्रभावित लोगों के लिए आवास तैयार कर रही है, जबकि दूसरी ओर पुनर्वास के लिए निर्धारित जमीन ही घटाई जा रही है।
उन्होंने कहा कि आरआर 2।1 आरक्षण का मूल उद्देश्य पुनर्वास और पुनर्स्थापन के लिए जमीन उपलब्ध कराना है। ऐसे में मुंबई में पुनर्वास आवास की बढ़ती जरूरत के बीच इस आरक्षित भूखंड को आवासीय क्षेत्र में बदलने का प्रस्ताव समझ से परे है।
आजमी ने बीएमसी की नीति में विरोधाभास का आरोप लगाते हुए कहा कि पीएपी आवासों पर भारी-भरकम राशि खर्च करने के बावजूद डेवलपमेंट प्लान में पुनर्वास के लिए तय भूमि कम की जा रही है।
33,332 पीएपी मकानों पर 20,751 करोड़ रुपये खर्च
बीएमसी के ताजा पीएपी विवरण का हवाला देते हुए आजमी ने बताया कि 33,332 पीएपी मकानों की कुल परियोजना लागत करीब 20,751।67 करोड़ रुपये है।
उनका कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में आवासों की जरूरत के बीच पुनर्वास के लिए उपलब्ध आरक्षित जमीन में कमी करना गंभीर चिंता का विषय है। उनके मुताबिक, भविष्य में परियोजनाओं से प्रभावित लोगों के पुनर्वास के लिए पर्याप्त जमीन उपलब्ध रखना जरूरी है।
सार्वजनिक भूमि से जुड़े फैसलों की समीक्षा की मांग
आजमी ने कहा कि यह विवाद सिर्फ 1,802।75 वर्ग मीटर के भूखंड तक सीमित नहीं है। मुंबई में सार्वजनिक आरक्षण, खुले मैदानों और जनहित के लिए निर्धारित भूखंडों में बदलाव की प्रवृत्ति भी चिंता बढ़ा रही है।
उन्होंने सेंचुरी मिल्स की जमीन, मुलुंड में पेट्रोल पंप के लिए प्रस्तावित मैदान, बांद्रा के नेविल डिसूजा फुटबॉल ग्राउंड और महालक्ष्मी रेसकोर्स की जमीन का उदाहरण देते हुए सार्वजनिक भूमि से जुड़े फैसलों की समीक्षा की जरूरत बताई।
आइटम नंबर 7 रद्द करने की मांग
अशरफ आजमी ने महापौर और बीएमसी कमिश्नर को पत्र भेजकर इम्प्रूवमेंट कमेटी के आइटम नंबर 7 को रद्द करने की मांग की है। उन्होंने सार्वजनिक उपयोग से जुड़े आरक्षणों में प्रस्तावित बदलावों की व्यापक समीक्षा करने और ऐसे निर्णयों पर रोक लगाने की भी मांग की।
उन्होंने बीएमसी से सार्वजनिक जमीन और पुनर्वास के लिए निर्धारित भूखंडों को संरक्षित रखने की अपील की है।
बीएमसी सभागृह नेता ने आरोपों को बताया निराधार
बीएमसी के सभागृह नेता गणेश खणकर ने आजमी के आरोपों को निराधार और बेबुनियाद बताया। उन्होंने कहा कि मुंबई में विकास कार्य तेजी से हो रहे हैं और विकास परियोजनाओं से प्रभावित लोगों को आवास उपलब्ध कराना तथा उनका पुनर्वास करना मनपा की जिम्मेदारी है।
उनके अनुसार, महायुति सरकार के वर्ष 2014 से कार्यकाल के दौरान विकास कार्यों के कारण प्रभावित लोगों की शिकायत नहीं मिली है।
डीपी-2034 में बदलाव पर भी उठाए सवाल
आजमी ने कहा कि यदि डीपी-2034 में बार-बार बदलाव किए जाएंगे तो विकास योजना की विश्वसनीयता और उसकी उपयोगिता पर सवाल उठेंगे। उन्होंने सार्वजनिक हित के लिए निर्धारित आरक्षणों में मनमाने बदलाव पर रोक लगाने की मांग की है।
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