मुंबई के ट्रैफिक में फंसे नितिन गडकरी, एक घंटे देर से पहुंचे कार्यक्रम में; मल्टी-लेवल फ्लाईओवर का दिया सुझाव

ट्रैफिक जाम के कारण कार्यक्रम में देरी से पहुंचे केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने माफी मांगी, पुराने फ्लाईओवर की जगह नई तकनीक से मल्टी-लेवल फ्लाईओवर बनाने पर दिया जोर

Rahul Gupta
मुंबई, 12 सितंबर।

केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को भी मुंबई के ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ा। ट्रैफिक में फंसने के कारण वह 22वें इंडो-अमेरिकन कॉर्पोरेट एक्सीलेंस अवॉर्ड्स 2026 के कार्यक्रम में करीब एक घंटे की देरी से पहुंचे। कार्यक्रम में पहुंचने के बाद गडकरी ने देरी के लिए माफी मांगी।

इस दौरान उन्होंने मुंबई समेत दूसरे बड़े शहरों में बढ़ती ट्रैफिक समस्या से निपटने के लिए पुराने फ्लाईओवर के बजाय आधुनिक तकनीक अपनाने की जरूरत बताई। गडकरी ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को भी इस दिशा में सुझाव देने की बात कही।

एक ही पिलर पर तीन फ्लाईओवर, चौथे लेवल पर मेट्रो

गडकरी ने पुणे में करीब 50 हजार करोड़ रुपये की फ्लाईओवर परियोजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि इनमें नई तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इस तकनीक के तहत एक ही पिलर पर अलग-अलग स्तरों पर फ्लाईओवर बनाए जा सकते हैं।

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उन्होंने कहा कि बढ़ते ट्रैफिक के कारण पहले बनाए गए कई फ्लाईओवर अब खुद ही यातायात के लिए बाधा बन रहे हैं। ऐसे में नई तकनीक के जरिए मल्टी-लेवल फ्लाईओवर तैयार करने की जरूरत है।

गडकरी के मुताबिक, नए मॉडल में पहले, दूसरे और तीसरे स्तर पर फ्लाईओवर बनाए जा सकते हैं, जबकि उसी पिलर पर चौथे स्तर पर मेट्रो चलाई जा सकती है। उन्होंने बताया कि यह तकनीक हाल ही में मलेशिया से मिली है और भारत ने इसे अपनाया है।

उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरी ट्रैफिक को देखते हुए पारंपरिक बुनियादी ढांचे के बजाय आधुनिक और मल्टी-लेवल परिवहन व्यवस्था पर ध्यान देने की जरूरत है।

भारत-अमेरिका सहयोग बढ़ाने पर भी जोर

कार्यक्रम में गडकरी ने भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक और तकनीकी सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के हितधारकों के बीच सहयोग, समन्वय और संवाद बढ़ाने की जरूरत है। इसमें इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

गडकरी ने कहा कि दोनों देशों को अपनी-अपनी ताकत पहचानकर उन क्षेत्रों में साथ काम करना चाहिए, जहां दोनों को फायदा हो। उनके मुताबिक, भारत के पास बड़ी क्षमता है, जबकि अमेरिका के पास संसाधन और उन्नत तकनीक है। दोनों की ताकत को मिलाकर ‘विन-विन’ स्थिति बनाई जा सकती है।

उन्होंने ज्ञान, नवाचार, उद्यमिता, विज्ञान, तकनीक और अनुसंधान को भविष्य की आर्थिक प्रगति के लिए महत्वपूर्ण बताया। गडकरी ने कहा कि आने वाले समय में ज्ञान को संपत्ति में बदलना जरूरी होगा और कृषि से लेकर रक्षा तक हर क्षेत्र में तकनीक की अहम भूमिका रहेगी।

जापान को पीछे छोड़ तीसरे नंबर पर पहुंचा भारत

गडकरी ने भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर की बढ़ती ताकत का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत जापान को पीछे छोड़कर अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल बाजार बन गया है।

उन्होंने बताया कि जब उन्होंने मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली थी, तब भारत के ऑटोमोबाइल उद्योग का आकार करीब 14 लाख करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 23 लाख करोड़ रुपये हो गया है।

गडकरी के मुताबिक, ऑटोमोबाइल बाजार के मामले में अमेरिका पहले और चीन दूसरे स्थान पर है। उन्होंने कहा कि भारत के ऑटोमोबाइल उद्योग में हुई यह वृद्धि देश की बढ़ती आर्थिक और औद्योगिक क्षमता को दर्शाती है।

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