रीमा सिंह
मुंबई, 13 सितंबर।
महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के महाराष्ट्र दौरे को लेकर सरकार और भाजपा पर तीखा निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमित शाह का दो दिवसीय महाराष्ट्र दौरा ‘सेवा संकल्प अभियान’ नहीं, बल्कि ‘मेवा संकल्प अभियान’ का आखिरी अंक है।
सपकाल ने कहा कि महाराष्ट्र इस समय सूखे और किसानों की गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। यदि केंद्र सरकार वास्तव में किसानों की मदद करना चाहती है तो अमित शाह को राज्य के किसानों के लिए सरसकट कर्जमाफी और प्रति हेक्टेयर 50 हजार रुपये की नुकसानभरपाई की घोषणा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसा होने पर ही उनके महाराष्ट्र दौरे का कोई सार्थक अर्थ होगा, अन्यथा यह दौरा केवल राजनीतिक कार्यक्रम बनकर रह जाएगा।
जमीन आवंटन पर उठाए सवाल
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में उद्योगपतियों को जमीन आवंटित किए जाने और इससे जुड़े आर्थिक लेन-देन की भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि क्या अमित शाह का दौरा जमीनों के आवंटन, कथित भ्रष्टाचार और भविष्य में होने वाले फैसलों का हिसाब लेने के लिए है।
सपकाल ने कुंभ मेले के दौरान हुए हजारों करोड़ रुपये के खर्च का भी हिसाब जनता के सामने रखने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि कुंभ मेले के नाम पर हुए कथित भ्रष्टाचार की समीक्षा के लिए भी इस दौरे का इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि, ये आरोप कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष के हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर महाराष्ट्र दौरे का कारण बताया जा रहा है, लेकिन कांग्रेस के अनुसार इसके पीछे राजनीतिक और आर्थिक हित भी जुड़े हुए हैं।
‘संघ का लिबरल चेहरा डुप्लीकेट’
सपकाल ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कथित ‘लिबरल’ रुख पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि संघ ने अपनी विचारधारा और वास्तविक उद्देश्यों को हमेशा स्पष्ट रूप से सामने नहीं रखा है। उन्होंने संविधान, तिरंगे और लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर संघ की ऐतिहासिक भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि संविधान और लोकतंत्र के प्रति संघ के वर्तमान रुख को स्पष्ट किया जाना चाहिए।
उन्होंने संघ और भाजपा पर मुस्लिम समाज के प्रति कथित विरोधाभासी रुख अपनाने का आरोप भी लगाया। सपकाल ने कहा कि एक ओर भाजपा और संघ की राजनीति में मुस्लिम विरोधी रुख दिखाई देता है, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कई इस्लामिक देशों के सर्वोच्च सम्मान मिल चुके हैं। उन्होंने इस विरोधाभास पर भाजपा और संघ से स्पष्टीकरण मांगा।
सपकाल ने संघ की विचारधारा, संविधान के प्रति उसकी भूमिका और मुस्लिम समाज को लेकर उसके दृष्टिकोण पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत से स्पष्ट जवाब देने की मांग की।
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