अशरफ आजमी ने कानूनी, वित्तीय और प्रशासनिक जांच की मांग की
रीमा सिंह
मुंबई, 15 सितंबर।
आर.वी. एंडरसन एसोसिएट्स लिमिटेड से जुड़े पुराने भुगतान विवाद को लेकर कांग्रेस के बीएमसी ग्रुप लीडर अशरफ आजमी ने मुंबई महानगरपालिका की कानूनी और वित्तीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने नगर आयुक्त को पत्र भेजकर मामले की व्यापक कानूनी, वित्तीय और प्रशासनिक जांच की मांग की है।
आर.वी. एंडरसन को मुंबई की सीवरेज व्यवस्था के संचालन, रखरखाव और उन्नयन से संबंधित कंसल्टेंसी का काम दिया गया था, जो 20 जून 2001 को पूरा हुआ था। भुगतान से जुड़े विवाद के बाद मामला मध्यस्थता (Arbitration) तक पहुंचा। 5 जून 2010 को तीन सदस्यीय Arbitral Tribunal ने बीएमसी को 20,78,349.25 अमेरिकी डॉलर और 14,76,736 रुपये सहित अन्य निर्धारित राशि का भुगतान करने का आदेश दिया था। साथ ही, संबंधित राशि पर 16 जून 2004 से 14 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का प्रावधान किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला
आजमी के अनुसार, 2010 के Award के बाद भी बीएमसी ने कानूनी चुनौती जारी रखी। मामला बॉम्बे हाईकोर्ट से होते हुए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और बीएमसी की चुनौती खारिज होने के बाद Review Petition भी दायर की गई। उनका कहना है कि लंबी कानूनी प्रक्रिया के दौरान ब्याज और विदेशी मुद्रा विनिमय दरों में बदलाव के कारण देनदारी बढ़ती गई।
आजमी ने बताया कि 2004 में डॉलर की औसत दर करीब 45.32 रुपये थी, जबकि सितंबर 2026 में यह करीब 95.92 रुपये के आसपास है। इस आधार पर 20,78,349.25 डॉलर की मूल राशि का रुपये में मूल्य लगभग 9.42 करोड़ से बढ़कर करीब 19.94 करोड़ रुपये हो गया। हालांकि इसमें ब्याज, Arbitration Costs, टैक्स और कानूनी खर्च शामिल नहीं हैं।
निर्णय लेने वालों की जिम्मेदारी तय करने की मांग
आजमी ने सवाल उठाया कि 2010 के Award के बाद मुकदमा जारी रखने की सलाह किस अधिकारी या कानूनी सलाहकार ने दी और किस स्तर पर उसे मंजूरी मिली। उन्होंने मांग की कि संबंधित Legal Opinions, Cost-Benefit Analysis और वित्तीय आकलन सार्वजनिक किए जाएं।
उन्होंने यह भी पूछा कि क्या प्रत्येक अपील से पहले 14 प्रतिशत ब्याज, विदेशी मुद्रा जोखिम, कानूनी खर्च और संभावित वित्तीय नुकसान का आकलन किया गया था। यदि ऐसा विश्लेषण नहीं हुआ, तो इसे प्रशासनिक और वित्तीय लापरवाही के नजरिए से जांचे जाने की मांग की गई है।
अन्य लंबित दावों की जानकारी मांगी
आजमी ने बीएमसी से यह जानकारी भी मांगी है कि उसके खिलाफ कितने आर्थिक दावे लंबित हैं, उनमें कितनी राशि पर ब्याज चल रहा है, कितने विदेशी मुद्रा संबंधी दावे हैं और अब तक कानूनी व मध्यस्थता पर कितना खर्च हुआ है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसे कई मामले हैं, तो यह बीएमसी की Litigation और Financial Risk Management Policy से जुड़ी व्यापक समस्या का संकेत हो सकता है।
आजमी ने कहा कि 2001 में पूरा हुआ काम, 2010 का Arbitral Award और उसके बाद वर्षों तक चली कानूनी प्रक्रिया यह सवाल खड़ा करती है कि देरी के कारण मुंबई के करदाताओं पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ कितना पड़ा। उन्होंने मामले में जिम्मेदारी तय करने और पूरी निर्णय प्रक्रिया सार्वजनिक करने की मांग की है।
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