550 करोड़ के नए मौसम केंद्रों पर सवाल, पुराने केंद्रों की देखभाल की निविदा रद्द

रीमा सिंह

मुंबई, 15 सितंबर।

राज्य में करीब 2,300 स्वचालित मौसम केंद्रों की देखभाल की निविदा रद्द होने के बीच नए मौसम केंद्रों के लिए 500 से 550 करोड़ रुपये के प्रस्ताव पर वंचित बहुजन आघाड़ी ने सवाल उठाए हैं। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष राजेंद्र पातोडे ने आरोप लगाया कि जब मौजूदा मौसम केंद्रों की व्यवस्था ही सुचारु नहीं है, तब नई प्रणाली पर इतना बड़ा खर्च करने की जरूरत और उपयोगिता सरकार को स्पष्ट करनी चाहिए।

पुराने केंद्रों की देखभाल की निविदा रद्द

राज्य के करीब 2,300 स्वचालित मौसम केंद्रों के रखरखाव की निविदा 27 जुलाई को रद्द कर दी गई थी। बताया गया कि ठेकेदारों ने सरकार द्वारा निर्धारित 4,500 से 4,800 रुपये के बजाय प्रति माह 5,000 से 6,000 रुपये की मांग की थी। फेरनिविदा के बाद भी समाधान नहीं निकलने के कारण केंद्रों के बंद होने की आशंका जताई जा रही है। फिलहाल इनके रखरखाव का करीब चार करोड़ रुपये मासिक खर्च आपदा प्रबंधन विभाग के फंड से करने की व्यवस्था की गई है।

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नए केंद्रों पर 550 करोड़ खर्च का सवाल

पातोडे ने कहा कि जब पुराने केंद्रों के रखरखाव का मुद्दा ही हल नहीं हुआ है, तो नए मौसम केंद्रों के लिए 500 से 550 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव क्यों लाया गया है। उन्होंने सरकार से इस प्रस्ताव की आवश्यकता, तकनीकी व्यवहार्यता और आर्थिक प्रभाव सार्वजनिक करने की मांग की। उनका आरोप है कि मौजूदा व्यवस्था में बदलाव से फसल बीमा कंपनियों को लाभ पहुंचने की आशंका है।

फसल बीमा दावों पर असर की चिंता

मौसम केंद्रों से मिलने वाले बारिश, तापमान और स्थानीय मौसम संबंधी आंकड़े मौसम आधारित फसल एवं फल फसल बीमा दावों के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे में यदि केंद्र बंद या खराब रहते हैं तो फसल नुकसान का आधिकारिक रिकॉर्ड कैसे तैयार होगा और बीमा दावे अस्वीकार होने पर जिम्मेदारी किसकी होगी, यह सवाल वंचित ने उठाया है।

पातोडे ने निविदा प्रक्रिया और फसल बीमा व्यवस्था की जांच की मांग करते हुए कहा कि किसानों से बीमा प्रीमियम लिया जाता है, लेकिन नुकसान दर्ज करने वाली व्यवस्था ही बाधित हो तो किसानों के हित प्रभावित हो सकते हैं।

दस्तावेज और स्वतंत्र जांच की मांग

वंचित ने सरकार से निविदा की शर्तें, कंपनियों द्वारा दिए गए दर, सरकारी दरपत्रक, तकनीकी परीक्षण, फेरनिविदा तथा निविदा रद्द करने के कारण सार्वजनिक करने की मांग की है। साथ ही पिछले वर्षों में मौसम संबंधी आंकड़ों के आधार पर मंजूर और खारिज किए गए बीमा दावों की जिलावार जानकारी जारी करने को कहा है।
पार्टी ने सभी स्वचालित मौसम केंद्रों की तत्काल जांच कर चालू और बंद केंद्रों की जिलावार सूची जारी करने, पिछले पांच वर्षों में खरीद, स्थापना, रखरखाव और मरम्मत खर्च का विशेष ऑडिट कराने तथा रद्द निविदा की स्वतंत्र जांच करने की मांग की है।

इसके अलावा नए केंद्रों के प्रस्तावित खर्च का स्वतंत्र तकनीकी और आर्थिक परीक्षण, पुराने केंद्रों की मरम्मत बनाम नए केंद्रों की स्थापना की लागत-उपयोगिता तुलना तथा नए केंद्रों की आगामी पांच से दस वर्षों की रखरखाव व्यवस्था का खुलासा करने की मांग मुख्य सचिव से की गई है। पार्टी ने कहा कि किसी भी स्तर पर अनियमितता पाए जाने पर संबंधित अधिकारी, ठेकेदार या संस्था के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

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