मराठवाड़ा के विकास और किसानों की राहत पर उद्धव ठाकरे का सरकार पर हमला, 60 हजार करोड़ के अनुशेष का दावा

मराठवाड़ा मुक्ति संग्राम दिवस पर छत्रपति संभाजीनगर में उद्धव ठाकरे ने किसानों की राहत में देरी, सूखे की स्थिति और क्षेत्र के लंबित विकास कार्यों को लेकर महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा

राहुल गुप्ता
छत्रपति संभाजीनगर, 17 सितंबर।

मराठवाड़ा मुक्ति संग्राम दिवस के अवसर पर छत्रपति संभाजीनगर में शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे की ओर से आयोजित आंदोलन में पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र सरकार पर मराठवाड़ा की उपेक्षा का आरोप लगाया। उन्होंने क्षेत्र के लंबित विकास कार्यों, किसानों की समस्याओं, सूखे जैसी स्थिति और विकास के अनुशेष को लेकर सरकार से जवाब मांगा।

उद्धव ठाकरे ने कहा कि मराठवाड़ा की वास्तविक स्थिति केवल सरकारी विज्ञापनों और प्रचार से नहीं बदलेगी। उनके मुताबिक जमीन पर किसानों और आम लोगों की समस्याएं अब भी बनी हुई हैं।

मराठवाड़ा के विकास के अनुशेष का मुद्दा उठाया

उद्धव ठाकरे ने दावा किया कि मराठवाड़ा के विकास का अनुशेष बढ़कर करीब 60 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि इस राशि की भरपाई कौन करेगा और क्षेत्र के लंबित विकास कार्य कब पूरे होंगे।

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ठाकरे ने मराठवाड़ा से निर्वाचित सत्तारूढ़ दलों के सांसदों और विधायकों से भी क्षेत्र की समस्याओं को प्रधानमंत्री के सामने मजबूती से उठाने की अपील की।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से मराठवाड़ा के विकास को लेकर घोषणाएं तो की जाती हैं, लेकिन पानी, रोजगार, सिंचाई और अधूरे विकास कार्यों से जुड़े सवाल अब भी कायम हैं।

किसानों के पंचनामे में देरी पर सवाल

उद्धव ठाकरे ने किसानों की स्थिति को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कई इलाकों में फसल नुकसान और सूखे जैसी परिस्थितियों के बावजूद राहत प्रक्रिया में देरी की जा रही है।

ठाकरे ने 5 अक्टूबर से फसल नुकसान के पंचनामे शुरू किए जाने के फैसले पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि किसान संकट और नुकसान झेल रहा है और उसे तत्काल मदद की जरूरत है।

उन्होंने सरकार से प्रभावित इलाकों में तत्काल सूखा घोषित करने और किसानों को सहायता देने की मांग की। साथ ही फसल नुकसान का जल्द से जल्द आकलन कराने की बात कही।

पूरे महाराष्ट्र में पंचनामों की निगरानी करेगी शिवसेना

ठाकरे ने कहा कि 5 अक्टूबर से उनकी पार्टी के नेता पूरे महाराष्ट्र में जाकर यह देखेंगे कि फसल नुकसान के पंचनामे सही तरीके से किए जा रहे हैं या नहीं।

उन्होंने कहा कि यदि किसानों को समय पर सहायता नहीं मिलती है तो इसके लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया जाएगा। ठाकरे ने पशुधन से जुड़े किसानों के मुद्दे भी उठाए और केवल घोषणाओं के बजाय प्रत्यक्ष सहायता देने की मांग की।

उन्होंने सरकार की विभिन्न योजनाओं में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए उनकी जांच की मांग भी की।

सभी वर्गों से एकजुट होने की अपील

आंदोलन के दौरान उद्धव ठाकरे ने मराठा, अन्य पिछड़ा वर्ग और आदिवासी समाज समेत सभी वर्गों से एकजुट होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मराठवाड़ा के विकास और किसानों के सवालों को किसी एक समाज या राजनीतिक दल तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए।

शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे की ओर से आयोजित इस आंदोलन का मुख्य नारा ‘मराठवाड़ा का विकास, तुमसे नहीं हो पाएगा’ रखा गया था। विभागीय आयुक्त कार्यालय के सामने हुए प्रदर्शन में ठाकरे ने सरकार से क्षेत्र के लंबित मुद्दों पर स्पष्ट जवाब और ठोस कार्रवाई की मांग की।

विकास और किसानों के मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगा

उद्धव ठाकरे के भाषण में मराठवाड़ा का विकास, किसानों की आर्थिक स्थिति, फसल नुकसान का आकलन, सूखे की स्थिति और लंबित विकास कार्य प्रमुख मुद्दे रहे।

उन्होंने कहा कि क्षेत्र की समस्याओं का समाधान केवल राजनीतिक घोषणाओं से नहीं, बल्कि समयबद्ध फैसलों और उनके प्रभावी क्रियान्वयन से होगा। आंदोलन के जरिए उन्होंने सरकार से मराठवाड़ा के विकास और किसानों की समस्याओं पर जवाबदेही तय करने की मांग की।

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