मुंबई के अस्पतालों में मेडिकल सामान पर 2841 प्रतिशत तक मुनाफे का दावा, कीमतों में पारदर्शिता की मांग

एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे के आंकड़ों के बाद चिकित्सा उपकरणों की खरीद कीमत और मरीजों से वसूली जाने वाली कीमत के बीच बड़े अंतर को लेकर सवाल उठे

राहुल गुप्ता
मुंबई, 18 सितंबर।

मुंबई के अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली चिकित्सा सामग्री की खरीद कीमत और मरीजों से वसूली जाने वाली अधिकतम खुदरा कीमत के बीच बड़े अंतर का मुद्दा चर्चा में है। महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) आयुक्त तुकाराम मुंढे की ओर से साझा किए गए आंकड़ों के बाद चिकित्सा उपकरण उद्योग और विशेषज्ञों ने मौजूदा मूल्य व्यवस्था में बदलाव की मांग उठाई है।

2841 प्रतिशत तक मुनाफे का दावा

तुकाराम मुंढे ने राज्य स्तरीय आधिकारिक सर्वेक्षण का हवाला देते हुए बताया कि अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली कुछ चिकित्सा सामग्रियों पर मुनाफे का स्तर 2841 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। उनके अनुसार, खरीद कीमत और मरीजों से वसूली जाने वाली कीमत के बीच इतना बड़ा अंतर मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल सकता है।

हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि 2841 प्रतिशत का आंकड़ा किन विशेष चिकित्सा उपकरणों या सामग्रियों पर लागू होता है। इसलिए इसे सभी चिकित्सा सामग्रियों पर लागू सामान्य मुनाफे के तौर पर नहीं देखा जा सकता।

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चिकित्सा उद्योग ने मूल्य व्यवस्था में बदलाव की मांग की

चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े संगठनों का कहना है कि समस्या का समाधान केवल मुनाफे की अधिकतम सीमा तय करने से नहीं होगा। भारतीय चिकित्सा संघ (आईएमए) की ओर से पहले ही एक ही औषधीय घटक के लिए समान लागत व्यवस्था का प्रस्ताव रखा जा चुका है।

इस व्यवस्था के तहत अलग-अलग कंपनियों के समान घटक वाले उत्पादों की कीमतों में अंतर को नियंत्रित करने का प्रयास किया जा सकता है। उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना है कि चिकित्सा उपकरणों, प्रत्यारोपण और अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली अन्य सामग्री के लिए मूल्य निर्धारण की पारदर्शी व्यवस्था जरूरी है।

बीमा कंपनियों की छूट व्यवस्था पर भी सवाल

चिकित्सा क्षेत्र के विशेषज्ञ डॉ. दीपक बैद ने कहा कि केवल मुनाफे की सीमा तय करना पर्याप्त समाधान नहीं है। उन्होंने बीमा कंपनियों की ओर से दवा और प्रत्यारोपण के बिल पर छूट मांगने की व्यवस्था को भी समस्या का एक हिस्सा बताया।

उनके अनुसार, कई मामलों में अस्पतालों या चिकित्सा प्रतिष्ठानों को बीमा कंपनियों के साथ बिल पर छूट देनी पड़ती है। इससे होने वाले आर्थिक नुकसान की भरपाई के लिए कभी-कभी फार्मेसी या अन्य मदों की कीमतों में बढ़ोतरी का दबाव बन सकता है।

उन्होंने कहा कि इसलिए बीमा कंपनियों और अस्पतालों के बीच भुगतान तथा छूट की व्यवस्था की भी समीक्षा जरूरी है।

कई चिकित्सा उपकरण कीमत नियंत्रण से बाहर

मौजूदा नियमों के तहत जरूरी दवाओं की कीमतों पर नियंत्रण लागू है, लेकिन कई चिकित्सा उपकरणों और अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली सामग्रियों पर उसी तरह की सख्त मूल्य सीमा नहीं है। ऐसे में इन उत्पादों की खरीद कीमत, अस्पताल की बिलिंग और मरीजों से वसूली जाने वाली अंतिम कीमत के बीच अंतर को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, मरीजों के हित में चिकित्सा सामग्री की खरीद कीमत, अस्पताल का मार्जिन और अंतिम बिलिंग को अधिक पारदर्शी बनाने की जरूरत है। इससे इलाज के खर्च में अनावश्यक बढ़ोतरी को रोकने में मदद मिल सकती है।

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