पैरासिटामोल और टेल्मिसर्टन गुणवत्ता परीक्षण में फेल, महाराष्ट्र के सरकारी अस्पतालों में वितरण रोका

एफडीए ने जीएमसीएच और मेयो अस्पताल को खराब बैच की दवाओं का वितरण रोकने और स्टॉक वापस लेने के निर्देश दिए, एक लाख से ज्यादा टेल्मिसर्टन और करीब 25 हजार पैरासिटामोल टैबलेट प्रभावित

राहुल गुप्ता
नागपुर, 18 सितंबर।

महाराष्ट्र में खाद्य एवं औषधि प्रशासन यानी एफडीए ने सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (जीएमसीएच) और इंदिरा गांधी सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (मेयो) को दो दवाओं का वितरण तत्काल रोकने और उपलब्ध स्टॉक वापस लेने का निर्देश दिया है। पैरासिटामोल 500 मिलीग्राम और टेल्मिसर्टन 40 मिलीग्राम के नमूने गुणवत्ता परीक्षण में निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं।

खराब पाए गए बैच में हाई ब्लड प्रेशर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली एक लाख से ज्यादा टेल्मिसर्टन टैबलेट और करीब 25 हजार पैरासिटामोल टैबलेट शामिल हैं। एफडीए अब इन दवाओं के उन्हीं बैच को वापस मंगाने के साथ सप्लाई चेन और निर्माता की ओर से नियमों के पालन की भी जांच करेगा।

इंदौर की कंपनी ने बनाई थीं दोनों दवाएं

एफडीए अधिकारियों के मुताबिक, दोनों दवाओं का निर्माण इंदौर स्थित क्यूरेजा हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड ने किया था। अधिकारियों ने अगस्त में मेयो अस्पताल से दवाओं के नमूने लिए थे। 10 सितंबर को आई परीक्षण रिपोर्ट में दोनों दवाएं निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं पाई गईं।

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पैरासिटामोल 500 मिलीग्राम को पैरासेव 500 के नाम से बेचा जाता है। इसका संबंधित बैच नंबर PTTC-108 है। वहीं हाई ब्लड प्रेशर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली टेल्मिसर्टन 40 मिलीग्राम का बैच नंबर CHPLT 416 है।

पैरासिटामोल टैबलेट के रंग में दिखा बदलाव

परीक्षण रिपोर्ट के मुताबिक, फार्माकोलॉजिकल असेसमेंट के दौरान पैरासिटामोल टैबलेट के रंग में मामूली बदलाव देखा गया। हालांकि, बाकी स्टॉक सामान्य पाया गया था। टेल्मिसर्टन 40 मिलीग्राम की गोलियां भी निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरीं।

रिपोर्ट मिलने के बाद जीएमसीएच के फार्माकोलॉजी विभाग ने वार्ड और आउटपेशेंट विभागों को संबंधित टैबलेट का वितरण तत्काल रोकने और उपलब्ध स्टॉक वापस करने के निर्देश दिए।

25 हजार पैरासिटामोल टैबलेट का स्टॉक वापस

जीएमसीएच अधिकारियों के मुताबिक, अस्पताल को जुलाई में करीब 25 हजार पैरासिटामोल टैबलेट की आपूर्ति की गई थी। गुणवत्ता परीक्षण की रिपोर्ट सामने आने के बाद यह पूरा स्टॉक वापस मंगा लिया गया।

जीएमसीएच और मेयो अस्पताल ने पैरासेव 500 की एक लाख से ज्यादा टैबलेट भी खरीदी थीं। एफडीए के निर्देश के बाद संबंधित बैच की दवाओं को मरीजों तक पहुंचने से रोकने के लिए अस्पताल स्तर पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

एफडीए ने जारी किया नोटिस

एफडीए ने ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत मेयो अस्पताल प्रशासन को अलग से नोटिस जारी किया है। इसमें दवाओं की खरीद, बिक्री और वितरण से संबंधित दस्तावेज जमा करने का निर्देश दिया गया है।

एफडीए के असिस्टेंट कमिश्नर मनीष चौधरी ने बताया कि सरकारी अस्पतालों में दवाओं की नियमित गुणवत्ता जांच की जाती है। अगस्त में लिए गए पैरासिटामोल और टेल्मिसर्टन के नमूनों की रिपोर्ट से पता चला कि संबंधित दवाएं गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं थीं।

उन्होंने कहा कि अस्पतालों को इन दवाओं का वितरण रोकने और उपलब्ध स्टॉक वापस लेने के निर्देश दिए गए हैं। एफडीए अब सप्लाई चेन और निर्माता की ओर से नियमों के पालन से जुड़े पहलुओं की भी जांच कर रहा है।

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