मुंबईकर ‘Bappa.org’ पर साझा करें गणेशोत्सव की परंपराएं और यादें

बीएमसी ने नागरिकों, आवासीय संस्थाओं, सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडलों और मंदिर न्यासों से की सहभागी होने की अपील

रीमा सिंह

मुंबई, 20 सितंबर।

मुंबई के समृद्ध श्रीगणेशोत्सव की सांस्कृतिक परंपराओं, धार्मिक प्रथाओं, पारिवारिक यादों, कलात्मक सजावट और सामाजिक गतिविधियों को डिजिटल रूप में संरक्षित करने के उद्देश्य से महाराष्ट्र शासन के सांस्कृतिक कार्य विभाग द्वारा ‘Bappa.org’ डिजिटल पहल शुरू की गई है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका प्रशासन ने मुंबईकरों से इस पहल में अधिक से अधिक संख्या में सहभागी होने की अपील की है।

परंपराओं को डिजिटल रूप में सहेजने की पहल

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श्रीगणेशोत्सव महाराष्ट्र की सामाजिक, सांस्कृतिक और लोक परंपरा का अभिन्न हिस्सा है। मुंबई शहर और उपनगरों में वर्षों से घरों और सार्वजनिक मंडलों के माध्यम से गणेशोत्सव की विभिन्न धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक परंपराएं निभाई जा रही हैं। प्रत्येक परिवार, आवासीय संस्था और गणेशोत्सव मंडल की अपनी अलग परंपरा और उत्सव से जुड़ी यादें हैं। इन विविध परंपराओं को डिजिटल माध्यम से संकलित कर महाराष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने में ‘Bappa.org’ महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

फोटो, वीडियो और यादें कर सकेंगे साझा

इस डिजिटल पहल के माध्यम से नागरिक अपने घर या सार्वजनिक गणेशोत्सव से संबंधित गणेश प्रतिमा, सजावट, पारंपरिक प्रथाओं, आरती, पारिवारिक यादों, उत्सव के अनुभव, पारंपरिक व्यंजनों, ऐतिहासिक संदर्भों, पर्यावरण अनुकूल गतिविधियों और सामाजिक कार्यों की जानकारी दर्ज कर सकेंगे। इसके लिए नागरिक ‘Bappa.org’ वेबसाइट पर गणेश प्रतिमा या सजावट का फोटो अपलोड कर उसके साथ अपनी परंपरा, सजावट या सामाजिक गतिविधि के बारे में संक्षिप्त जानकारी दे सकते हैं। इसके अलावा फोटो, वीडियो और गणेशोत्सव से जुड़े विभिन्न अनुभव भी डिजिटल रूप में दर्ज किए जा सकेंगे।

सांस्कृतिक विविधता को मिलेगा डिजिटल मंच

मुंबई के गणेशोत्सव में पारंपरिक आरतियों और पारिवारिक रीति-रिवाजों से लेकर सार्वजनिक मंडलों के सामाजिक उपक्रम, कलात्मक झांकियां, पर्यावरण अनुकूल गणेश प्रतिमाएं, शाडू मिट्टी की प्रतिमा निर्माण के प्रयास और सामाजिक संदेश देने वाली सजावट शामिल होती है। इन परंपराओं और गतिविधियों का डिजिटल दस्तावेज तैयार होने से मुंबई के गणेशोत्सव की सांस्कृतिक विविधता को संरक्षित करने में मदद मिलेगी।

अगली पीढ़ी तक पहुंचेगी विरासत

बीएमसी प्रशासन ने कहा कि गणेशोत्सव के माध्यम से संरक्षित सांस्कृतिक परंपराओं, पर्यावरण जागरूकता और सामाजिक प्रतिबद्धता को डिजिटल रूप में दर्ज करना आने वाली पीढ़ियों के लिए उपयोगी होगा। नागरिकों, आवासीय संस्थाओं, सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडलों और मंदिर न्यासों से अपनी गणेशोत्सव से जुड़ी तस्वीरें, यादें, परंपराएं और सामाजिक गतिविधियों की जानकारी ‘Bappa.org’ पर साझा करने की अपील की गई है।

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