महाराष्ट्र में सूखे जैसे हालात के बीच शरद पवार का दौरा, 28 सितंबर से किसानों के बीच जाएंगे

पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार किसानों से सीधे संवाद करेंगे, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर पहले ही सूखा घोषित करने और किसानों को हेक्टेयर के हिसाब से 50 हजार रुपये मदद देने की मांग कर चुके हैं

राहुल गुप्ता
मुंबई, 21 सितंबर।

महाराष्ट्र के कई जिलों में कम बारिश के कारण फसलों को नुकसान पहुंचने के बीच वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार 28 सितंबर से सूखा प्रभावित इलाकों का दौरा करेंगे। पवार इस दौरान किसानों के खेतों पर जाकर उनसे बातचीत करेंगे और फसल नुकसान तथा पानी की स्थिति की जानकारी लेंगे।

राज्य सरकार ने 5 अक्टूबर से फसलों के नुकसान के पंचनामे शुरू करने की घोषणा की है। ऐसे में किसानों की ओर से पंचनामे और राहत मिलने में लगने वाले समय को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में शरद पवार के दौरे को लेकर राजनीतिक और किसान संगठनों के बीच चर्चा है।

शरद पवार गुट के नेता रोहित पवार ने भी सूखा प्रभावित इलाकों का दौरा शुरू कर दिया है। इससे पहले शरद पवार ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर राज्य में सूखा घोषित करने और प्रभावित किसानों को प्रति हेक्टेयर 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की मांग की थी।

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शरद पवार ने रखीं 9 मांगें

शरद पवार ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में सूखे की स्थिति से निपटने और किसानों को राहत देने के लिए कुल नौ मांगें रखी हैं।

तत्काल सूखा घोषित करने की मांग

पवार ने राज्य में मौजूदा स्थिति की गंभीरता को देखते हुए औपचारिक मानदंडों का इंतजार किए बिना तत्काल सूखा घोषित करने की मांग की है। उन्होंने गंभीर स्थिति वाले तालुकों को तुरंत सूखा प्रभावित घोषित कर राहत और रियायतें लागू करने की मांग भी की है।

किसानों को 50 हजार और खेत मजदूरों को 25 हजार रुपये

पवार ने प्रभावित किसानों को प्रति हेक्टेयर कम से कम 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की मांग की है। इसके साथ ही खेत मजदूर परिवारों को भी 25 हजार रुपये की विशेष सहायता देने की मांग की गई है।

कर्जमाफी और फसल ऋण

आर्थिक संकट से जूझ रहे किसानों के लिए कर्जमाफी योजना तत्काल लागू करने और किसानों को तुरंत फसल ऋण उपलब्ध कराने की मांग की गई है।

नियमित रूप से कर्ज चुकाने वाले किसानों को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि 50 हजार से बढ़ाकर 1 लाख रुपये करने की मांग भी पत्र में की गई है। इसके अलावा 2025-26 में फसल ऋण लेकर इस साल डिफॉल्टर हुए किसानों को भी कर्जमाफी योजना में शामिल करने की मांग की गई है।

फसल बीमा का लाभ देने की मांग

पवार ने एक रुपये वाली फसल बीमा योजना को पूर्व प्रभाव से लागू करने और किसानों के हित में पहले हटाए गए सभी ट्रिगर भी पूर्व प्रभाव से लागू करने की मांग की है।

इसके अलावा पिछले साल बेमौसम बारिश से हुए नुकसान के लिए घोषित 17 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की फसल बीमा सहायता भी तत्काल वितरित करने की मांग की गई है।

रोजगार गारंटी और फलों के बागों के लिए पानी

सूखा प्रभावित तालुकों में रोजगार गारंटी योजना के तहत विशेष काम शुरू करने की मांग की गई है। इनमें कृषि और जल संरक्षण से जुड़े कामों के साथ अन्य रोजगारपरक कार्य शामिल हैं।

फलों के बागों को बचाने के लिए टैंकर से पानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था शुरू करने की मांग भी की गई है।

पीने के पानी और चारे की व्यवस्था

जिन गांवों में पीने के पानी की कमी है, उनका तत्काल सर्वेक्षण कर जरूरत के मुताबिक सरकारी टैंकर शुरू करने की मांग की गई है।

पवार ने सूखा प्रभावित क्षेत्रों में मांग के अनुसार चारा शिविर शुरू करने, पशुओं के लिए पीने का पानी उपलब्ध कराने और आवश्यक पशु चिकित्सा सेवाएं मुहैया कराने की मांग भी की है।

बिजली व्यवस्था सुधारने की मांग

सूखे के दौरान लोड शेडिंग की समस्या बढ़ने का हवाला देते हुए पवार ने बिजली ट्रांसफॉर्मर की मरम्मत का काम समय पर पूरा कराने के लिए ऊर्जा विभाग के माध्यम से विशेष अभियान चलाने की मांग की है।

नियंत्रण कक्ष बनाने की मांग

पवार ने प्रत्येक जिले में बारिश, फसलों की स्थिति, पानी की उपलब्धता, चारे की स्थिति और पशुधन की स्थिति पर रोजाना निगरानी रखने के लिए राज्य और जिला स्तर पर नियंत्रण कक्ष शुरू करने की मांग की है।

छात्रों की पूरी फीस माफ करने की मांग

सूखा प्रभावित तालुकों के स्कूलों, कॉलेजों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों में केवल परीक्षा शुल्क माफ करने के बजाय विद्यार्थियों की पूरी शैक्षणिक फीस माफ करने का निर्णय तत्काल लेने की मांग भी पवार ने की है।

अब 28 सितंबर से शुरू होने वाले शरद पवार के दौरे के दौरान किसानों की समस्याओं और सूखे की स्थिति को लेकर उनकी ओर से क्या रुख सामने आता है, इस पर नजर रहेगी।

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