भूख हड़ताल के बाद अस्पताल में भर्ती मनोज जरांगे ने सरकार पर मराठा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामले दर्ज करने और जांच एजेंसियों के इस्तेमाल का आरोप लगाया, पुराने कुणबी रिकॉर्ड की खोज को लेकर भी दी जानकारी
राहुल गुप्ता
छत्रपति संभाजीनगर, 23 सितंबर।
मराठा आरक्षण आंदोलन के कार्यकर्ता मनोज जरांगे का छत्रपति संभाजीनगर के एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है। भूख हड़ताल खत्म करने के बाद मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर मराठा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का आरोप लगाया।
जरांगे ने आरोप लगाया कि मराठा समुदाय के लोगों के खिलाफ मामले दर्ज किए जा रहे हैं और आयकर विभाग समेत अन्य एजेंसियों के जरिए जांच शुरू की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को याद रखना चाहिए कि सत्ता हमेशा नहीं रहती और 2029 का चुनाव आने वाला है।
एकनाथ शिंदे पर लगाए आरोप
मनोज जरांगे ने कहा कि मराठा समुदाय ने एकनाथ शिंदे को महाराष्ट्र की राजनीति में सम्मान दिलाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि आज वही शिंदे मराठा प्रदर्शनकारियों से बदला ले रहे हैं।
जरांगे ने कहा कि अगर किसी ने कोई गलत काम नहीं किया है तो डरने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार उन्हें जेल भेजना चाहती है तो वह जेल जाने के लिए तैयार हैं, लेकिन न तो वह और न ही मराठा समुदाय किसी के सामने झुकेगा।
फडणवीस सरकार पर भी साधा निशाना
जरांगे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर भी आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि मराठा समुदाय के खिलाफ रणनीति बनाने के लिए कैबिनेट की बैठक की गई थी और इसके बाद मंत्रियों ने समुदाय के लोगों को फोन कर धमकाना शुरू किया।
हालांकि, ये आरोप मनोज जरांगे की ओर से लगाए गए हैं। सरकार की ओर से इन आरोपों पर प्रतिक्रिया की जानकारी इस रिपोर्ट में नहीं दी गई है।
20 दिन की भूख हड़ताल के बाद अस्पताल में इलाज
मनोज जरांगे ने 17 सितंबर को अपनी 20 दिन लंबी भूख हड़ताल समाप्त की थी। राज्य सरकार ने उनकी मराठा आरक्षण से जुड़ी मांगों पर कार्रवाई के लिए तीन महीने का समय मांगा था। इसके बाद उन्होंने मुंबई तक मार्च करने की अपनी योजना को भी अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया था।
पुराने कुणबी रिकॉर्ड की खोज पर क्या बोले जरांगे?
मनोज जरांगे ने पुराने कुणबी रिकॉर्ड की खोज से जुड़े सरकार के एक परिपत्र का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने ऐसा शासन निर्णय जारी किया है, जिसके तहत मोडी और फारसी लिपि पढ़ने वाले विशेषज्ञों को पुराने रिकॉर्ड खोजने के लिए विशेष अधिकार दिए गए हैं।
उन्होंने राज्यभर के मोडी और फारसी लिपि के जानकारों से 23 से 27 सितंबर के बीच छत्रपति संभाजीनगर के गैलेक्सी अस्पताल पहुंचकर अपना नाम दर्ज कराने की अपील की। जरांगे के मुताबिक, मराठवाड़ा के प्रत्येक तालुका में मोडी लिपि के दो और फारसी लिपि के दो पाठकों की नियुक्ति की जाएगी।
कुणबी रिकॉर्ड को लेकर क्या है विवाद?
जरांगे का दावा है कि मराठा आरक्षण आंदोलन के दौरान मराठा समुदाय से जुड़े करीब 58 लाख कुणबी रिकॉर्ड सामने आए हैं। उनका आरोप है कि इन रिकॉर्ड की संख्या कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
कुणबी समुदाय अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी श्रेणी में शामिल है। मनोज जरांगे ऐसे पात्र मराठों को कुणबी प्रमाणपत्र देने की मांग करते रहे हैं, जिनके दस्तावेजी रिकॉर्ड का संबंध कुणबी समुदाय से मिलता है।
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