न्यूज़म ब्यूरो
मुंबई, 23 सितंबर।
महाराष्ट्र में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का मसौदा तैयार करने के लिए गठित समिति से बॉम्बे हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस आर.सी. चव्हाण ने इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने समिति की कार्यप्रणाली, जनमत जुटाने के लिए तैयार की जा रही प्रश्नावली और बैठक में गैर-सदस्य की मौजूदगी को लेकर आपत्ति जताई। उनका इस्तीफा 19 सितंबर को दिया गया था, जिसे राज्य सरकार ने स्वीकार कर लिया है।
बैठक में पर्याप्त चर्चा नहीं होने का दावा
चव्हाण ने अपने इस्तीफे में आरोप लगाया कि कुछ महत्वपूर्ण एजेंडों पर पर्याप्त चर्चा नहीं हुई। इनमें पिछली बैठक की कार्यवाही की पुष्टि, यूसीसी पर लोगों की राय लेने के लिए वेबसाइट में बदलाव और प्रश्नावली को अंतिम रूप देना शामिल था। उन्होंने कहा कि सदस्यों के सुझावों पर भी अपेक्षित चर्चा नहीं हुई।
प्रश्नावली को लेकर मतभेद
चव्हाण के अनुसार, बैठक में प्रश्नावली को अंतिम रूप दिया जाना था, लेकिन अध्यक्ष जस्टिस रंजना देसाई द्वारा तैयार प्रश्नावली पहले ही सदस्यों को भेजी जा चुकी थी। उन्होंने कहा कि वह चाहते थे कि लोगों से विवाह में देरी, वैवाहिक अस्थिरता, बांझपन और विवाद निपटारे जैसे विषयों पर विस्तृत राय ली जाए।
बाहरी अधिकारी की मौजूदगी पर भी आपत्ति
चव्हाण ने समिति की बैठक में एक ऐसे अधिकारी की मौजूदगी पर भी सवाल उठाया, जो समिति का सदस्य नहीं था। उनके अनुसार, उक्त अधिकारी ने जनमत के लिए तैयार वेबसाइट में बदलाव की जरूरत बताई थी। इसी घटनाक्रम को लेकर उन्होंने समिति की कार्यप्रणाली पर असहमति जताई।
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