न्यूज़म ब्यूरो
मुंबई, 23 सितंबर। आईआईटी बॉम्बे के 20 वर्षीय छात्र साहिल वाकोडे की आत्महत्या के मामले ने शिक्षा व्यवस्था, छात्र मानसिक स्वास्थ्य और कैंपस में कथित जातिगत भेदभाव को लेकर बहस तेज कर दी है। इसी बीच महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने घटना पर दुख जताते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत बताई है।
राज ठाकरे ने कहा कि परीक्षा में अनियमितता रोकना शिक्षकों की जिम्मेदारी है, लेकिन जांच पूरी होने से पहले किसी छात्र को दोषी ठहराना उचित नहीं है। इसी तरह, जातीय उत्पीड़न के आरोप लगने पर बिना जांच किसी शिक्षक को दोषी मान लेना भी सही नहीं है।
गौरतलब है कि साहिल के परिवार ने जातिगत भेदभाव और मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं, जबकि आईआईटी बॉम्बे ने कहा है कि साहिल ने संस्थान के एससी-एसटी सेल या प्रशासन के पास ऐसी कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई थी। मामले में पुलिस ने आत्महत्या के लिए उकसाने और एससी/एसटी अत्याचार निवारण कानून के तहत एफआईआर दर्ज की है और जांच जारी है।
राज ठाकरे ने कहा कि घटना का मूल सवाल यह होना चाहिए कि आखिर ऐसी क्या परिस्थितियां थीं, जिनके बीच एक युवा छात्र ने अपनी जान दे दी। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में बढ़ती प्रतिस्पर्धा, पढ़ाई के दबाव और प्लेसमेंट को लेकर तनाव को गंभीर मुद्दा बताया।
उन्होंने छात्रों से जाति और धर्म के नाम पर होने वाली राजनीति से दूर रहकर शिक्षा व्यवस्था की खामियों पर सवाल उठाने की अपील की। साथ ही, उन्होंने आईआईटी बॉम्बे के छात्रों की 24 घंटे मानसिक स्वास्थ्य सहायता, पारदर्शी शिकायत निवारण व्यवस्था और संवेदनशील अनुशासनात्मक प्रक्रिया जैसी मांगों का समर्थन किया।
राज ठाकरे ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में जरूरी सुधार करना ही साहिल वाकोडे को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। फिलहाल मामले की जांच मुंबई क्राइम ब्रांच कर रही है और सीसीटीवी समेत अन्य साक्ष्यों के आधार पर घटना की परिस्थितियों की पड़ताल की जा रही है।
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