न्यूज़म ब्यूरो
मुंबई, 23 सितंबर। कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर उठाए गए सवालों के बीच द इंडियन एक्सप्रेस की 23 सितंबर की एक जांच रिपोर्ट सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग के कुछ फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज कीं। इन आपत्तियों में मतदाता पंजीकरण, नाम जोड़ने-हटाने, Form 6 में बदलाव और मतदाता डेटा के प्रबंधन से जुड़े मुद्दे शामिल हैं।
मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष और सांसद वर्षा गायकवाड़ ने इस रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि राहुल गांधी ने पहले ही मतदाता सूची और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए थे और अब सामने आई रिपोर्ट ने इन सवालों को और गंभीर बना दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
मतदाता सूची में पारदर्शिता की मांग
वर्षा गायकवाड़ ने कहा कि लोकतंत्र में मतदाता का विश्वास सबसे महत्वपूर्ण है। मतदाता सूची को लेकर किसी भी प्रकार का संदेह गंभीर विषय है और चुनाव आयोग को इससे जुड़े सभी सवालों के स्पष्ट जवाब देश के सामने रखने चाहिए। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ना, हटाना या बहाल करना केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि नागरिक के मतदान के संवैधानिक अधिकार से जुड़ा विषय है।
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों ने मतदाता सूची के प्रबंधन में बढ़ते केंद्रीकरण पर चिंता जताई थी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि Form 6 में किए गए बदलावों पर आपत्ति दर्ज की गई थी।
Form 6 और ECINet को लेकर सवाल
रिपोर्ट के अनुसार, नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 में ऐसा सवाल जोड़ा गया था, जिसमें आवेदक से उसके या उसके माता-पिता अथवा दादा-दादी के पिछले विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की मतदाता सूची में नाम होने के बारे में जानकारी मांगी गई थी। चुनाव आयुक्तों ने इस बदलाव के लिए नियमों में संशोधन की आवश्यकता को लेकर सवाल उठाए थे।
वर्षा गायकवाड़ ने इस पूरे मामले में कई सवालों के जवाब मांगे हैं। इनमें दोनों चुनाव आयुक्तों द्वारा दर्ज की गई 14 आपत्तियों पर हुई कार्रवाई, मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने और बहाली की प्रक्रिया, ECINet प्रणाली में अधिकारों के केंद्रीकरण, Form 6 में बदलाव के कानूनी आधार तथा मतदाता डेटा की सुरक्षा और स्वतंत्र ऑडिट की व्यवस्था शामिल है।
चुनाव आयोग ने रिपोर्ट पर दी अलग प्रतिक्रिया
इस बीच चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों ने इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में उठाए गए मतभेदों के आकलन से अलग रुख रखा है। आयोग के अनुसार, पिछले एक वर्ष में लिए गए सभी निर्णय, जिनमें SIR से संबंधित फैसले भी शामिल हैं, तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए और आंतरिक स्तर पर दर्ज अलग-अलग टिप्पणियां सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
वर्षा गायकवाड़ ने कहा कि चुनाव आयोग को मतदाता
सूची और चुनावी प्रक्रिया से संबंधित इन सवालों पर सार्वजनिक रूप से स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मतदाताओं के अधिकारों और चुनावी प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं की गई, तो चुनाव व्यवस्था पर जनता के विश्वास को लेकर सवाल बने रहेंगे।
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