विदर्भ में 50 दिनों से बारिश का इंतजार, अकोला-बुलढाणा में सोयाबीन की फलियों में नहीं पड़े दाने; उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने किसानों को भरोसा दिया कि दशहरा और दिवाली काली नहीं होने दी जाएगी
राहुल गुप्ता
अकोला, 24 सितंबर। महाराष्ट्र के विदर्भ में बारिश की लंबी कमी ने सोयाबीन किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अकोला और बुलढाणा जिले के कई इलाकों में करीब 50 दिनों से बारिश नहीं होने के कारण खेतों में खड़ी सोयाबीन की फसल बर्बाद होने की कगार पर पहुंच गई है। स्थिति का जायजा लेने पहुंचे उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने किसानों की समस्याएं सुनीं और भरोसा दिलाया कि सरकार इस संकट में किसानों के साथ खड़ी है।
खेतों में खड़ी फसल, लेकिन फलियों में नहीं आए दाने
विदर्भ में सोयाबीन खरीफ की प्रमुख फसलों में शामिल है, लेकिन बारिश में लंबे अंतराल के कारण फसल पर गंभीर असर पड़ा है। खेतों में सोयाबीन के पौधे खड़े दिखाई दे रहे हैं, लेकिन कई पौधों की फलियों में दाने नहीं बन पाए हैं। इससे पैदावार में भारी गिरावट की आशंका है।
जमीनी स्थिति देखने के लिए उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे सीधे किसानों के खेतों तक पहुंचे और फसल का निरीक्षण किया। इस दौरान किसानों ने उन्हें बारिश की कमी और उससे हुए नुकसान की जानकारी दी।
संकट बड़ा है तो मदद भी बड़ी होगी
खेतों का निरीक्षण करने के बाद एकनाथ शिंदे ने ‘आज तक’ से बातचीत में कहा कि इस साल किसानों पर बड़ा संकट आया है। उन्होंने कहा कि जब संकट बड़ा है तो सरकार की मदद भी बड़ी होगी। उन्होंने कहा कि वह खुद किसानों के बांध तक जाकर उनकी स्थिति देख रहे हैं और सरकार पूरी मजबूती से उनके साथ खड़ी है।
दशहरा और दिवाली काली नहीं होने देगी सरकार
त्योहारों के दौरान किसानों की आर्थिक स्थिति को लेकर पूछे गए सवाल पर उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार किसानों की दशहरा और दिवाली काली नहीं होने देगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि त्योहारों से पहले किसानों को राहत देने के लिए सरकार हरसंभव कदम उठाएगी।
किसानों ने बताया कि सोयाबीन की फसल तैयार करने में बीज, खाद, दवाइयों और मजदूरी पर लाखों रुपये खर्च हुए हैं। कई किसानों ने खेती के लिए बैंक से कर्ज लिया है, जबकि कुछ ने निजी तौर पर पैसे उधार लेकर फसल में निवेश किया है।
पत्नी का मंगलसूत्र गिरवी रखकर जुटाए पैसे
अकोला के व्याला गांव में फसल का निरीक्षण करने के दौरान कान्हेरी गांव के किसान समाधान सुलकर अपनी परेशानी बताते हुए भावुक हो गए। उन्होंने उपमुख्यमंत्री को बताया कि खेती के लिए बैंक से कर्ज लेने के बाद भी जब दवाइयों के छिड़काव और अन्य खर्चों के लिए पैसे कम पड़ गए तो उन्हें अपनी पत्नी का मंगलसूत्र तक साहूकार के पास गिरवी रखना पड़ा।
समाधान सुलकर ने बताया कि बारिश नहीं होने से फसल खराब हो गई है और अब बच्चों की पढ़ाई के खर्च को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।
किसान को भावुक होते देख एकनाथ शिंदे ने उनके कंधे पर हाथ रखा और उन्हें ढांढस बंधाया। उन्होंने किसान को नुकसान की भरपाई के लिए सरकार की ओर से मदद का भरोसा दिया।
कर्ज चुकाने की चिंता में किसान
चौपाल में मौजूद अन्य किसानों ने भी उपमुख्यमंत्री के सामने अपनी समस्याएं रखीं। किसानों का कहना है कि उन्होंने खेती में अपनी गाढ़ी कमाई और लाखों रुपये लगाए हैं। अगर फसल की पैदावार कम रही तो आमदनी प्रभावित होगी और बैंक तथा निजी कर्ज चुकाना मुश्किल हो जाएगा।
किसानों ने सरकार से मांग की कि खेतों में हुए वास्तविक नुकसान का जल्द आकलन किया जाए और बिना देरी राहत पैकेज उपलब्ध कराया जाए, ताकि बारिश की कमी से पैदा हुए आर्थिक संकट से उन्हें राहत मिल सके।
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