भिवंडी के रोशन बाग इलाके में एक ऑटो में करीब 17 स्कूली बच्चे सवार दिखे; वायरल वीडियो के बाद ट्रैफिक पुलिस ने चालक के खिलाफ कार्रवाई की
राहुल गुप्ता
भिवंडी, 25 सितंबर। महाराष्ट्र के भिवंडी में स्कूली बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा हैरान करने वाला मामला सामने आया है। रोशन बाग इलाके में एक ऑटो रिक्शा में क्षमता से कई गुना अधिक बच्चों को बैठाकर ले जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो सामने आने के बाद ट्रैफिक पुलिस ने संबंधित ऑटो चालक के खिलाफ कार्रवाई की है।
एक ऑटो में सवार थे करीब 17 बच्चे
वायरल वीडियो में एक ऑटो रिक्शा में करीब 17 स्कूली विद्यार्थियों को बैठाकर ले जाते हुए देखा जा सकता है। ऑटो में बच्चों के बैठने के लिए बेहद कम जगह थी। कई बच्चे चालक की सीट के आसपास दिखाई दे रहे थे, जबकि पीछे की सीट पर करीब 6 से 7 बच्चे बैठे थे।
सामान रखने के लिए बनाई गई पिछली जगह में भी 2 से 3 बच्चों के बैठे होने का दावा किया गया है। इस दौरान एक जागरूक नागरिक ने बच्चों को इस तरह ले जाते हुए अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड कर लिया। बाद में वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
हादसा होता तो बढ़ सकता था खतरा
क्षमता से अधिक बच्चों को एक ही ऑटो में बैठाकर ले जाने से दुर्घटना की स्थिति में गंभीर खतरा पैदा हो सकता था। अचानक ब्रेक लगने, ऑटो पलटने या किसी अन्य हादसे की स्थिति में बच्चों के लिए बाहर निकलना मुश्किल हो सकता था।
वीडियो वायरल होते ही ट्रैफिक पुलिस की कार्रवाई
वीडियो सामने आने के बाद ट्रैफिक पुलिस ने संबंधित ऑटो चालक के खिलाफ कार्रवाई की। हालांकि, स्थानीय नागरिकों का कहना है कि भिवंडी में क्षमता से अधिक स्कूली बच्चों को ऑटो में बैठाकर ले जाने का यह अकेला मामला नहीं है।
लोगों के मुताबिक, शहर में कई ऑटो रिक्शा में निर्धारित क्षमता से ज्यादा बच्चों को बैठाकर ले जाने की शिकायतें सामने आती रहती हैं। नागरिकों ने बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए नियमित जांच और नियमों का उल्लंघन करने वाले चालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
स्कूली परिवहन व्यवस्था पर भी सवाल
इस घटना ने स्कूली बच्चों के परिवहन की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। कई स्कूलों में बस की सुविधा उपलब्ध है, लेकिन कुछ अभिभावक बस शुल्क से बचने के लिए निजी ऑटो का सहारा लेते हैं। वहीं, जिन स्कूलों में परिवहन की सुविधा नहीं है, वहां अभिभावक स्थानीय ऑटो चालकों पर निर्भर रहते हैं।
ऑटो चालकों को निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाने से रोका जाता है। इसके बावजूद नियमों का उल्लंघन कर बच्चों को एक ही ऑटो में ठूंसकर ले जाने के मामले सामने आ रहे हैं। अभिभावकों और नागरिकों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए और नियम तोड़ने वाले वाहनों पर लगातार कार्रवाई की जानी चाहिए।
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