अमेरिका के दबाव का आरोप लगाकर प्रकाश आंबेडकर का पीएम मोदी पर हमला

मुंबई, 26 सितंबर। वंचित बहुजन आघाड़ी (वीबीए) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट प्रकाश आंबेडकर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अमेरिका के कथित दबाव में काम करने का आरोप लगाते हुए तीखा हमला बोला है। आंबेडकर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट के जरिए प्रधानमंत्री पर निशाना साधा और दावा किया कि केंद्र सरकार अमेरिकी हितों के आगे देश के हितों से समझौता कर रही है।

आंबेडकर ने अपनी पोस्ट में प्रधानमंत्री मोदी को लेकर बेहद तीखी भाषा का इस्तेमाल करते हुए लिखा कि वे ‘‘खुद अमेरिका की धुन पर मुजरा कर रहे हैं’’। उन्होंने आगे प्रधानमंत्री से सवाल किया कि क्या अमेरिका को उनके कथित ‘‘काले राज’’ की जानकारी है। हालांकि, ये आरोप आंबेडकर के राजनीतिक दावे हैं और उनके समर्थन में पोस्ट में कोई स्वतंत्र प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है।

म्यांमार ट्रेनिंग कैंप मामले से जुड़ा घटनाक्रम

आंबेडकर की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब म्यांमार से जुड़े कथित ड्रोन-युद्ध प्रशिक्षण शिविर मामले में गिरफ्तार सात विदेशी नागरिकों को दिल्ली की विशेष एनआईए अदालत से राहत मिली है। इनमें अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरॉन वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिक शामिल हैं। अदालत ने पहले वैनडाइक को डिफॉल्ट जमानत दी थी और बाद में छह यूक्रेनी नागरिकों को भी डिफॉल्ट जमानत मिली।

रिपोर्टों के अनुसार, एनआईए ने निर्धारित अवधि में यूएपीए के तहत आरोपपत्र दाखिल नहीं किया था। अदालत के समक्ष दाखिल आरोपपत्र में यूएपीए की धाराएं शामिल नहीं थीं, जिसके बाद डिफॉल्ट जमानत का सवाल उठा। छह यूक्रेनी नागरिकों को एक-एक लाख रुपये के नकद बांड पर जमानत दी गई।

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एक महीने के लिए अमेरिका और यूक्रेन जाने की अनुमति

इसके बाद 24 सितंबर को राउज एवेन्यू स्थित विशेष एनआईए अदालत ने वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों को एक महीने के लिए अपने-अपने देश जाने की अनुमति दी। अदालत ने उन्हें परिवार से मिलने के लिए अमेरिका और यूक्रेन जाने की मंजूरी दी तथा पासपोर्ट जारी करने का आदेश दिया। यह अनुमति निर्धारित शर्तों और औपचारिकताओं के अधीन दी गई।

इस घटनाक्रम के बीच आंबेडकर के अमेरिका संबंधी आरोपों ने राजनीतिक बहस को और तीखा कर दिया है। हालांकि, उपलब्ध न्यायिक रिपोर्टों में इन विदेशी नागरिकों को मिली जमानत या यात्रा अनुमति को अमेरिकी दबाव से जोड़ने वाली कोई अदालत की टिप्पणी सामने नहीं आई है। इसलिए दोनों घटनाओं को समयगत रूप से समानांतर घटनाक्रम के रूप में ही प्रस्तुत करना उचित होगा।

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