ठाणे के पुलिस उपनिरीक्षक किसान भोईर की ड्यूटी के दौरान मौत, हिरासत में लिए गए व्यक्ति से झड़प के बाद सिर पर लगी गंभीर चोट
राहुल गुप्ता
ठाणे, 27 सितंबर। गणेशोत्सव की सुरक्षा ड्यूटी के दौरान ठाणे के 56 वर्षीय पुलिस उपनिरीक्षक किसान कमलाकर भोईर की मौत के मामले ने पुलिसकर्मियों की ड्यूटी के दौरान सामने आने वाले जोखिम को फिर चर्चा में ला दिया है। भोईर करीब तीन दशक तक पुलिस सेवा में रहे और 2028 में सेवानिवृत्त होने वाले थे।
24 सितंबर की रात नियमित गश्त के दौरान एक व्यक्ति से हुई झड़प के बाद उनके सिर पर सीमेंट की ईंट से गंभीर चोट लगी थी। अस्पताल ले जाने के कुछ ही समय बाद उनकी मौत हो गई।
गणपति सुरक्षा ड्यूटी के दौरान शुरू हुआ विवाद
भोईर चितलसर पुलिस स्टेशन में तैनात थे और गणपति उत्सव की सुरक्षा व्यवस्था के लिए पोखरण रोड नंबर दो के आसपास ड्यूटी पर थे। रात करीब 11 बजे पुलिस टीम ने राजू प्रेमकुमार वाल्मीकि नाम के 30 वर्षीय व्यक्ति को कथित तौर पर नशे की हालत में हंगामा करते देखा।
पुलिस टीम ने उसे हिरासत में लेकर थाने ले जाने का फैसला किया। इसी दौरान स्थिति बिगड़ गई और पुलिस तथा उस व्यक्ति के बीच झड़प शुरू हो गई।
पीछा करते समय हुई दूसरी झड़प
पुलिस के अनुसार, वाल्मीकि वहां से भागने लगा और भोईर ने उसका पीछा किया। सिटी फ्लो बस स्टॉप के पास दोनों के बीच फिर झड़प हुई।
पुलिस का कहना है कि इसी दौरान वाल्मीकि ने भोईर को धक्का दिया, जिससे वह सड़क पर गिर गए। भोईर उठने की कोशिश कर रहे थे, तभी आरोपी ने कथित तौर पर पास पड़ी सीमेंट की ईंट उठाकर उनके सिर के पिछले हिस्से पर हमला कर दिया।
घटना की जगह पर खड़ी बसों और कम रोशनी के कारण पुलिसकर्मी को कुछ समय तक भोईर दिखाई नहीं दिए। उनके साथ मौजूद कांस्टेबल ने तलाश शुरू की और उन्हें सड़क पर घायल हालत में पाया।
आरोपी को पीछा कर पकड़ा गया
घटना के बाद कंट्रोल रूम को सूचना दी गई। आसपास गश्त कर रहे बीट मार्शलों ने भी आरोपी की तलाश शुरू की। पुलिस के अनुसार, टीम ने पीछा करते हुए वाल्मीकि को पकड़ लिया।
गंभीर रूप से घायल भोईर को मनपाड़ा के टाइटन अस्पताल ले जाया गया, जहां रात करीब 11:41 बजे डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस के मुताबिक उनके सिर पर गंभीर चोट लगी थी और काफी खून बह गया था।
1990 में कांस्टेबल के रूप में शुरू किया था सफर
भोईर ने 1990 में कांस्टेबल के रूप में पुलिस सेवा शुरू की थी और बाद में पदोन्नति पाकर सहायक पुलिस उपनिरीक्षक और फिर पुलिस उपनिरीक्षक बने। वह पालघर के रहने वाले थे और ठाणे में पत्नी तथा तीन बेटों के साथ रहते थे।
परिवार के अनुसार, उन्होंने सेवानिवृत्ति के बाद के जीवन की तैयारी शुरू कर दी थी। उन्होंने अपने गांव में जमीन खरीदी थी और वहां छोटा कारोबार शुरू करने की योजना बना रहे थे।
पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच में यह घटना झड़प के दौरान हुई प्रतीत होती है और अभी तक ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है कि आरोपी ने पहले से हमला करने की योजना बनाई थी। मामले में आगे की जांच जारी है।
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