राहुल गुप्ता
लातूर, 27 सितंबर। महाराष्ट्र के लातूर जिले में बारिश की कमी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। लंबे समय से पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण खेतों में खड़ी खरीफ फसलें सूखने लगी हैं। रेणापुर इलाके के किसान बालाजी कदम ने बताया कि बारिश के अभाव में उनकी तीन एकड़ में लगी सोयाबीन की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई। हालात ऐसे बने कि उन्होंने खड़ी फसल पर ट्रैक्टर चलाकर उसे नष्ट कर दिया। लातूर और आसपास के इलाकों में कम बारिश से सोयाबीन समेत खरीफ फसलों को बड़े नुकसान की रिपोर्ट सामने आई है।
शुरुआत में बारिश हुई तो कर दी थी बुवाई
मॉनसून की शुरुआत में कुछ इलाकों में बारिश होने के बाद किसानों ने सोयाबीन और कपास जैसी खरीफ फसलों की बुवाई कर दी थी। इसके बाद लंबे समय तक पर्याप्त बारिश नहीं हुई, जिससे खेतों में खड़ी फसलों को पानी नहीं मिल सका। कई जगह फसलें पीली पड़ने के बाद सूख गईं।
बालाजी कदम ने भी शुरुआती बारिश के भरोसे अपने खेत में सोयाबीन की बुवाई की थी। लेकिन बाद में बारिश नहीं होने से फसल को पर्याप्त पानी नहीं मिला। उन्होंने बताया कि इलाके में बोरवेल, कुएं और नदियों में भी पानी की स्थिति खराब हो गई है।
खाद-बीज के लिए लिया था ब्याज पर पैसा
बालाजी कदम के मुताबिक, सोयाबीन की खेती के लिए उन्होंने खाद, बीज और कीटनाशक खरीदने के लिए ब्याज पर पैसा लिया था। फसल बर्बाद होने के बाद उनकी लागत भी डूब गई है। उन्होंने सरकार से आर्थिक मुआवजे की मांग करते हुए कहा कि खरीफ की फसल खराब होने के बाद अब रबी की खेती के लिए भी किसानों को आर्थिक मदद की जरूरत है।
लातूर में बारिश की कमी से बढ़ा फसल संकट
लातूर में इस साल बारिश की कमी का असर खेती और जलस्रोतों पर दिखाई दे रहा है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, जिले और आसपास के मराठवाड़ा क्षेत्र में लंबे सूखे दौर ने सोयाबीन समेत खरीफ फसलों को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। कुछ इलाकों में जो फसलें बची हैं, उन्हें किसान उपलब्ध पानी के सहारे किसी तरह बचाने की कोशिश कर रहे हैं।
वहीं, जिन किसानों के पास सिंचाई की व्यवस्था नहीं है, उनके सामने खड़ी फसल को बचाने का विकल्प भी सीमित होता जा रहा है। जलस्रोतों में पानी घटने के कारण आने वाले रबी सीजन को लेकर भी किसानों की चिंता बढ़ गई है।
महाराष्ट्र के 265 तालुकों में सूखा घोषित
इस बीच महाराष्ट्र सरकार ने 26 सितंबर को राज्य के 358 में से 265 तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किया है। इन तालुकों में लातूर समेत 32 जिलों के क्षेत्र शामिल हैं। सरकार ने फसल नुकसान के आकलन के बाद आर्थिक सहायता देने की बात कही है। इसके अलावा फसल ऋण पुनर्गठन, कृषि पंपों के बिजली बिल में राहत और कृषि ऋण की वसूली स्थगित करने जैसे उपायों की घोषणा की गई है।
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