राहुल गुप्ता
मुंबई, 27 सितंबर। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की ओर से 2 अक्टूबर को मुंबई में प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन को पुलिस ने अनुमति नहीं दी है। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने रविवार को यह दावा करते हुए कहा कि अगर उन्हें लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने की अनुमति नहीं दी गई, तो गांधी जयंती के दिन मुंबई में ‘जेल भरो आंदोलन’ शुरू किया जाएगा। मुंबई पुलिस की ओर से अनुमति नहीं दिए जाने की बात की स्वतंत्र पुष्टि के बजाय फिलहाल दीपके और सीजेपी के दावे पर आधारित रिपोर्टें उपलब्ध हैं।
नागरिकों की आवाज दबाने का लगाया आरोप
पुलिस के फैसले के बाद अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं देना नागरिकों की आवाज दबाने की कोशिश है।
दीपके ने इससे पहले घोषणा की थी कि अगर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार 26 सितंबर तक अपने पद से इस्तीफा नहीं देते हैं, तो सीजेपी 2 अक्टूबर को मुंबई से राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू करेगी। इसके बाद आंदोलन को देश के अन्य शहरों तक ले जाने की बात कही गई थी।
सीजेपी की तीन प्रमुख मांगें
सीजेपी ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर तीन प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग, एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया पर रोक लगाने तथा जनवरी 2025 की मतदाता सूची को बहाल करने की मांग शामिल है।
पार्टी ने चुनाव आयोग से संबंधित 2023 के कानून को निरस्त करने और चुनाव व्यवस्था में सुधार की भी मांग की है। ये सीजेपी की ओर से रखी गई मांगें हैं।
चुनाव आयोग के भीतर आपत्तियों को लेकर विवाद
ज्ञानेश कुमार को लेकर विवाद उस समय और बढ़ा जब चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधु और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार मतदाता सूची, नए मतदाताओं के पंजीकरण, नाम हटाने और एसआईआर से जुड़े फैसलों पर लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं।
रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ प्रक्रियाओं और मतदाता डेटाबेस के प्रबंधन को लेकर सवाल उठाए थे। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने इन रिपोर्टों के बाद स्पष्ट किया कि एसआईआर समेत महत्वपूर्ण फैसले आयोग के सभी तीन सदस्यों की सहमति से लिए गए हैं। आयोग ने यह भी कहा कि विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय सामने आना संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा है।
असम में भी सीजेपी कार्यकर्ताओं की हिरासत का दावा
सीजेपी से जुड़ा यह विवाद मुंबई तक सीमित नहीं है। पार्टी ने इससे पहले असम में अपने सह-संयोजक आशुतोष रांका और अन्य स्वयंसेवकों को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने का दावा किया था। इस घटना के बाद अभिजीत दीपके ने असम सरकार पर भी विरोध की आवाज दबाने का आरोप लगाया था।
फिलहाल 2 अक्टूबर के प्रस्तावित आंदोलन को लेकर मुंबई पुलिस द्वारा अनुमति नहीं दिए जाने के बाद सीजेपी ने ‘जेल भरो आंदोलन’ की चेतावनी दी है। आगे पुलिस और प्रशासन की ओर से इस प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर नजर रहेगी।
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