राहुल गुप्ता
मुंबई, 28 सितंबर। महाराष्ट्र के कई हिस्सों में सूखे की स्थिति बनी हुई है। बारिश की कमी के कारण खेतों में खड़ी फसलें सूख गई हैं और किसान चिंतित हैं। कई इलाकों में पानी का संकट भी गंभीर हो गया है। राज्य सरकार ने सूखे की स्थिति का जायजा लेने के बाद 265 तालुकों में सूखा घोषित किया है। इससे प्रभावित किसानों के लिए राहत और सहायता उपायों का रास्ता साफ हुआ है।
अब 2027 तक पानी की जरूरत का आकलन
इस साल सूखे की मार झेल रहे महाराष्ट्र के सामने अगले साल भी पानी का संकट खड़ा होने की आशंका जताई जा रही है। मानसून की शुरुआत से ही अल नीनो के संभावित प्रभाव को लेकर चर्चा थी। मौसम की स्थिति को लेकर कभी अत्यधिक बारिश तो कभी सूखे जैसी परिस्थितियों की आशंका जताई गई थी। इस बार कई हिस्सों में कम बारिश के कारण सूखे की स्थिति सामने आई है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विदर्भ और मराठवाड़ा के सूखाग्रस्त इलाकों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया था। इसके बाद राज्य के 265 तालुकों में सूखा घोषित किया गया।
बांधों का पानी पहले पीने के लिए रखने की तैयारी
अल नीनो का प्रभाव केवल इस साल तक सीमित रहने की संभावना को देखते हुए राज्य सरकार ने अगले साल के लिए भी पानी का नियोजन शुरू कर दिया है। जुलाई 2027 तक राज्य में पीने के पानी की कितनी जरूरत होगी, इसका अनुमान लगाकर योजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके तहत बांधों में उपलब्ध पानी में से जुलाई 2027 तक पीने के पानी के लिए जरूरी मात्रा आरक्षित रखने का विचार है। इसके बाद बचने वाले पानी का इस्तेमाल उद्योगों और रबी फसलों के लिए करने पर फैसला लिया जा सकता है।
अल नीनो को लेकर विशेषज्ञों की चेतावनी
प्रशांत महासागर के समुद्री जल के तापमान में असामान्य बढ़ोतरी से अल नीनो की स्थिति बनती है। इसका असर दुनियाभर के मौसम पर पड़ सकता है और भारत के मानसून पर भी इसका प्रभाव देखा जाता है।
विशेषज्ञों की ओर से आने वाले दिनों में अल नीनो के प्रभाव को लेकर चेतावनी दी जा रही है। 2027 में भी इसके असर की आशंका को देखते हुए राज्य सरकार ने अभी से पानी की उपलब्धता और भविष्य की जरूरतों का आकलन शुरू कर दिया है।
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