पानी की बूंद-बूंद को तरसा महाराष्ट्र का गांव, अब हर तरफ लगे ‘गांव बिकाऊ है’ के पोस्टर; 26 साल से अटकी नहर ने बढ़ाई मुसीबत

राहुल गुप्ता
तुलशी, 29 सितंबर। खेतों में धूल उड़ रही है, कुएं सूख चुके हैं और पीने के पानी के लिए ग्रामीणों को टैंकरों का इंतजार करना पड़ रहा है। महाराष्ट्र के सोलापुर जिले की माधा तहसील के तुलशी गांव में पानी की समस्या इतनी गंभीर हो गई है कि ग्रामीणों ने जगह-जगह ‘गांव बिकाऊ है’ के पोस्टर लगा दिए हैं। करीब 7 हजार की आबादी वाले इस गांव में पानी के टैंकर पहुंचते ही ग्रामीणों की लंबी कतार लग जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से मांग और सरकारी आश्वासनों के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ है।

26 साल से अटकी नहर, टैंकरों के भरोसे गांव

तुलशी गांव के पास सिना-माधा सिंचाई योजना के तहत खुदाई का काम हुआ था, लेकिन नहर का काम आगे नहीं बढ़ सका। गांव के सरपंच शरद मोरे के मुताबिक, गांव में हर साल पानी की समस्या सामने आती है। उन्होंने कहा कि सिना-माधा योजना को मंजूरी मिलने के बावजूद तुलशी को इसका लाभ नहीं मिल रहा है।

मोरे ने बताया कि बीते 26 साल से नहर का काम अटका हुआ है। अगर नहर गांव तक पहुंच जाए तो पानी की समस्या काफी हद तक खत्म हो सकती है। ‘गांव बिकाऊ है’ के पोस्टर लगाने का मकसद सरकार का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर आकर्षित करना है।

भूख हड़ताल और थाली बजाकर जताया विरोध

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रामीणों ने 14 सितंबर को पानी की मांग को लेकर भूख हड़ताल की थी। इसके अलावा माधा तहसील कार्यालय के बाहर एक दिन थाली बजाकर भी विरोध प्रदर्शन किया गया, जिसे ‘थाली नाद’ विरोध प्रदर्शन का नाम दिया गया।

ग्रामीणों का कहना है कि अगर पानी की समस्या का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इस साल बारिश कम होने के कारण पहले से गंभीर जल संकट और बढ़ गया है।

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खेती और पशुपालन पर भी पड़ा असर

ग्रामीणों के मुताबिक पानी की कमी का असर केवल पीने के पानी तक सीमित नहीं है। गांव में खेती प्रभावित हो रही है और लोग पशु पालने से भी पीछे हट रहे हैं। एक ग्रामीण ने कहा कि जल जीवन मिशन चल रहा है, लेकिन अब तक गांव को इसका अपेक्षित लाभ नहीं मिल सका है।

पानी की कमी का असर गांव के सामाजिक जीवन पर भी पड़ने का दावा किया जा रहा है। सरपंच शरद मोरे के मुताबिक, गांव के करीब 350 लोग अविवाहित हैं और पानी की समस्या के कारण परिवार अपनी बेटियों की शादी यहां करने से भी हिचकते हैं।

2024 में भी मिला था पानी का भरोसा

बताया गया है कि वर्ष 2024 में कृष्णा घाटी विकास निगम की ओर से सिना-माधा सिंचाई योजना के जरिए तुलशी गांव तक पानी पहुंचाने की बात कही गई थी। इसके बावजूद गांव में पानी की स्थायी उपलब्धता नहीं हो सकी है।

ग्रामीणों का कहना है कि जब तक नहर का काम पूरा नहीं होता और गांव तक पानी नहीं पहुंचता, तब तक टैंकरों पर निर्भरता बनी रहेगी। ‘गांव बिकाऊ है’ के पोस्टर इसी लंबे इंतजार और नाराजगी को सामने रखने का ग्रामीणों का तरीका है।

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