राहुल गुप्ता
छत्रपति संभाजीनगर, 30 सितंबर। न्यायपालिका और न्यायमूर्तियों के बारे में कथित तौर पर आपत्तिजनक बयान देने के मामले में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के राज्यसभा सांसद संजय राऊत और अन्य के खिलाफ मुंबई हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ में फौजदारी अवमान याचिका दाखिल की गई है। मामले में पीठ ने संबंधित प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने का आदेश दिया है।
किसने दाखिल की याचिका?
अमित श्रीकांत देशपांडे ने अधिवक्ता शैलेंद्र गंगाखेडकर के माध्यम से यह याचिका दाखिल की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि हाईकोर्ट के एक आदेश के बाद हुई न्यायिक कार्यवाही पर प्रतिक्रिया देते हुए राऊत की ओर से न्यायपालिका की प्रतिष्ठा को प्रभावित करने वाले कथित बयान दिए गए।
इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति एस.सी. मोरे और न्यायमूर्ति वैशाली जाधव-पाटील की पीठ के समक्ष हुई। राऊत के कथित बयानों को प्रकाशित या प्रसारित करने वाले कुछ मीडिया संस्थानों के संपादकों को भी मामले में प्रतिवादी बनाया गया है।
महाधिवक्ता की अनुमति के बाद दाखिल हुई याचिका
याचिका में न्यायालय की अवमानना अधिनियम, 1971 की धारा 15 के तहत आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के लिए महाधिवक्ता की अनुमति का उल्लेख किया गया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, राज्य के महाधिवक्ता डॉ. मिलिंद साठे ने अमित देशपांडे को फौजदारी अवमान याचिका दाखिल करने की अनुमति दी थी। इसके बाद याचिका औरंगाबाद पीठ में दाखिल की गई।
न्यायपालिका पर राऊत के बयानों का हवाला
याचिका में आरोप लगाया गया है कि संजय राऊत ने पिछले कुछ महीनों में विभिन्न पत्रकार वार्ताओं और सार्वजनिक मंचों पर न्यायपालिका की कार्यप्रणाली को लेकर तीखी टिप्पणियां की थीं। इनमें कुछ मामलों में न्यायालय के रुख पर सवाल उठाने के साथ न्यायपालिका पर राजनीतिक दबाव में काम करने जैसे आरोप लगाए जाने का भी उल्लेख है।
हालांकि, ये सभी बातें याचिका में लगाए गए आरोपों और राऊत के कथित बयानों के संदर्भ में हैं। अदालत ने अभी इन आरोपों की सत्यता पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है।
मामले में हाईकोर्ट ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है और आगे की सुनवाई 22 अक्टूबर 2026 को होने की जानकारी सामने आई है।
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