विधायक रईस शेख ने विधि एवं न्याय विभाग के प्रधान सचिव को सौंपा पत्र
मुंबई, 30 सितंबर। महाराष्ट्र में प्रस्तावित समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया में अल्पसंख्यक समुदाय से एक सलाहकार और एक सदस्य नियुक्त करने की मांग समाजवादी पार्टी के भिवंडी पूर्व विधायक रईस शेख ने की है। इस संबंध में उन्होंने विधि एवं न्याय विभाग के प्रधान सचिव स्वप्नील खाटी से मुलाकात कर उन्हें पत्र सौंपा।
व्यापक और समावेशी प्रक्रिया पर जोर
राज्य सरकार द्वारा सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी शत्रुघ्न सिंह को यूसीसी समिति का सलाहकार नियुक्त किए जाने के बाद रईस शेख ने अपनी मांग दोहराई है। उन्होंने कहा कि यूसीसी के प्रस्तावित मसौदे को तैयार करते समय प्रक्रिया व्यापक, समावेशी और पारदर्शी होनी चाहिए। इसके लिए अल्पसंख्यक समुदाय के एक योग्य व्यक्ति को सलाहकार तथा एक अन्य योग्य व्यक्ति को समिति का सदस्य बनाया जाना चाहिए।
व्यक्तिगत कानून और पारिवारिक मामलों पर पड़ेगा असर
विधायक शेख ने अपने पत्र में कहा कि यूसीसी के तहत विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने सहित नागरिकों के व्यक्तिगत और पारिवारिक जीवन से जुड़े कई विषयों पर प्रावधान प्रस्तावित किए जा सकते हैं। ऐसे में मसौदा तैयार करते समय महाराष्ट्र में रहने वाले विभिन्न समुदायों के अनुभव, चिंताओं और विचारों को ध्यान में रखना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय से सलाहकार की नियुक्ति होने से व्यक्तिगत कानून, पारिवारिक मामलों और प्रस्तावित यूसीसी के व्यावहारिक प्रभावों से जुड़े दृष्टिकोण को मसौदा तैयार करने तथा परामर्श प्रक्रिया में उचित स्थान मिल सकेगा।
रिक्त पद पर अल्पसंख्यक समुदाय के प्रतिनिधि की मांग
रईस शेख ने बताया कि पिछले सप्ताह उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर यूसीसी समिति में अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्य की नियुक्ति की मांग की थी। उन्होंने पत्र में कहा था कि न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) आर. सी. चव्हाण के इस्तीफे के बाद समिति में एक पद रिक्त है।
उन्होंने मांग की कि इस रिक्त पद पर अल्पसंख्यक समुदाय, विशेष रूप से मुस्लिम समुदाय से किसी योग्य एवं पात्र व्यक्ति को समिति का सदस्य नियुक्त किया जाए।
सभी वर्गों को अपनी राय रखने का अवसर मिले
शेख ने समिति की परामर्श प्रक्रिया को भी अधिक व्यापक बनाने की मांग की है। उनके अनुसार, अल्पसंख्यक समुदाय के साथ-साथ महिलाओं, कानून विशेषज्ञों, धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों, नागरिक समाज समूहों और आम नागरिकों को भी प्रस्तावित यूसीसी पर अपनी राय रखने का पारदर्शी अवसर दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि राज्य के विभिन्न सामाजिक वर्गों की भागीदारी से यूसीसी के मसौदे पर व्यापक विचार-विमर्श संभव होगा और समिति को विभिन्न समुदायों से जुड़े मुद्दों तथा व्यावहारिक चिंताओं को समझने में मदद मिलेगी।
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