बेबी फूड के प्रचार पर FDA की सख्ती, टीवी से सोशल मीडिया तक विज्ञापन पर रोक

न्यूज़म ब्यूरो

मुंबई, 30 सितंबर। शिशुओं के लिए इस्तेमाल होने वाले फूड प्रोडक्ट्स के प्रचार-प्रसार को लेकर खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने सख्ती के निर्देश दिए हैं। इन प्रोडक्ट्स का प्रचार टीवी, प्रिंट मीडिया, आउटडोर विज्ञापन, वेबसाइट, सर्च विज्ञापन, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के साथ-साथ सोशल मीडिया, इन्फ्लुएंसर्स और मैसेजिंग ऐप्स के जरिए भी नहीं किया जा सकेगा। प्रचार में जरूरी चेतावनी और निर्धारित जानकारी देना अनिवार्य होगा।

FDA के मुताबिक, कंपनियां अपने उत्पाद को मां के दूध के बराबर या उससे बेहतर बताकर प्रचार नहीं कर सकतीं। मुफ्त सैंपल, गिफ्ट, कूपन या किसी अन्य तरह के प्रलोभन के जरिए उत्पादों को बढ़ावा देने पर भी रोक है। कंपनियों को गर्भवती महिलाओं और माताओं से प्रचार के उद्देश्य से संपर्क करने की भी अनुमति नहीं होगी।

डॉक्टर और अस्पताल भी प्रचार से बाहर

निर्देशों के तहत डॉक्टर, अस्पताल और मेडिकल एसोसिएशन का इस्तेमाल इन उत्पादों के प्रचार के लिए नहीं किया जा सकेगा। IMS Act, 1992 के तहत स्वास्थ्यकर्मियों को आर्थिक लाभ, गिफ्ट या अन्य प्रोत्साहन देने पर रोक है। सेमिनार, कॉन्फ्रेंस, रिसर्च, फेलोशिप, CME और CPD कार्यक्रमों के जरिए भी अप्रत्यक्ष प्रचार नहीं किया जा सकेगा।

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पैकेजिंग पर पूरी जानकारी अनिवार्य

FDA ने बेबी फूड की पैकेजिंग पर सामग्री और पोषक तत्वों की स्पष्ट जानकारी देने पर भी जोर दिया है। पैकेट या बोतल पर ऊर्जा, प्रोटीन, वसा, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन और मिनरल्स समेत अन्य पोषक तत्वों की जानकारी देनी होगी। प्रिजर्वेटिव, रंग, फ्लेवरिंग एजेंट और अन्य मिलाई गई सामग्री का विवरण भी स्पष्ट करना होगा।

‘No Added Sugar’ या ‘Sugar Free’ जैसे दावे करने वाले उत्पादों में अतिरिक्त चीनी नहीं होनी चाहिए। FDA के निर्देशों के अनुसार सुक्रोस या फ्रुक्टोज की मात्रा निर्धारित सीमा के भीतर रखना जरूरी होगा।

सप्लाई चेन से लेकर अस्पतालों तक जांच

FDA की कार्रवाई केवल निर्माताओं तक सीमित नहीं रहेगी। जांच में कच्चे माल के स्रोत, निर्माण, मार्केटिंग, स्टोरेज और बिक्री की भी पड़ताल की जाएगी। अस्पतालों, डॉक्टरों और मेडिकल स्टोर तक उत्पादों की सप्लाई और वहां नियमों के पालन की भी जांच होगी।

FDA ने स्वास्थ्य विभाग और मेडिकल एजुकेशन विभाग को भी निर्देश भेजे हैं। आने वाले दिनों में इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (IAP), इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) और अस्पतालों से जुड़े संगठनों के साथ बैठक कर नियमों के पालन और जागरूकता को लेकर चर्चा की जाएगी।

FDA के अनुसार बेबी फूड कारोबार में FSSAI के नियमों के साथ IMS Act, 1992 और Infant Nutrition Regulations, 2020 का पालन जरूरी है। नियमों के उल्लंघन पर FSSAI Act के तहत कार्रवाई और जुर्माने का प्रावधान है। भ्रामक विज्ञापन पर 10 लाख रुपये तक, कुछ लाइसेंस संबंधी उल्लंघनों पर 5 लाख रुपये तक और मिसब्रांडिंग के मामलों में 3 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। असुरक्षित उत्पाद पाए जाने पर कानून के तहत अधिक गंभीर कार्रवाई का भी प्रावधान है।

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