राहुल गुप्ता
मुंबई, 1 अक्टूबर। मोबाइल रिपेयरिंग का काम करने वाले एक मैकेनिक के नाम पर कथित तौर पर कंपनी खोलकर वित्तीय लेनदेन किए गए। मामला तब सामने आया, जब उसके पास जीएसटी और आयकर विभाग से 31.80 करोड़ रुपये के कथित बकाये का नोटिस पहुंचा। नोटिस मिलने के बाद महेंद्र म्हापांकर ने आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) से संपर्क किया और अपनी पहचान व दस्तावेजों के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाया।
शिकायत के आधार पर कालाचौकी पुलिस थाने में संजय तांबे, उनके दोस्त सुभान कुरैशी और उनके साथियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धाराओं 406, 420, 120(बी) और 506(2) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। मामले की आगे की जांच ईओडब्ल्यू को सौंप दी गई है।
बिजनेस शुरू करने के नाम पर लिए दस्तावेज
पुलिस सूत्रों के अनुसार, म्हापांकर कालाचौकी इलाके में रहते हैं और कॉटन ग्रीन में मोबाइल रिपेयर की दुकान चलाते हैं। कोरोना महामारी के दौरान उन्होंने बीएमसी क्लीन-अप मार्शल के तौर पर काम किया था। इसी दौरान उनकी पहचान तांबे से हुई, जो उस समय क्लीन-अप मार्शल के तौर पर काम कर रहे थे।
म्हापांकर का आरोप है कि बाद में तांबे ने उनके साथ मिलकर बिजनेस शुरू करने का सुझाव दिया और इसके लिए उनके जरूरी दस्तावेज ले लिए। शिकायत के मुताबिक, इन्हीं दस्तावेजों का इस्तेमाल बैंक अकाउंट खोलने और बाद में उनके नाम पर ‘गैलेक्सी ट्रेडर्स’ नाम की कंपनी शुरू करने में किया गया।
जीएसटी और आयकर विभाग के नोटिस ईमेल के जरिए मिलने के बाद मामले की जानकारी सामने आई। ये नोटिस म्हापांकर के चार्टर्ड अकाउंटेंट के संज्ञान में भी आए।
बिना जानकारी के करोड़ों के लेनदेन का आरोप
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि तांबे, कुरैशी और उनके साथियों ने उनकी जानकारी के बिना ‘गैलेक्सी ट्रेडर्स’ के जरिए वित्तीय लेनदेन किए। शिकायत के अनुसार, कंपनी का जीएसटी अकाउंट केनरा बैंक और एक्सिस बैंक के खातों से जुड़ा था और इन्हीं के जरिए कथित तौर पर लेनदेन किए गए।
म्हापांकर का आरोप है कि जब उन्होंने इन लेनदेन पर आपत्ति जताई तो कुरैशी ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी। उन्होंने दावा किया कि उनके नाम पर खोली गई कंपनी के जरिए करोड़ों रुपये के वित्तीय लेनदेन किए गए, जिसके चलते उनके नाम पर 31,80,05,709 रुपये का जीएसटी बकाया दर्ज हो गया।
म्हापांकर ने आरोप लगाया कि इन कथित लेनदेन से उन्हें और सरकार को आर्थिक नुकसान हुआ। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच ईओडब्ल्यू को सौंप दी है और अब कथित कंपनी, बैंक खातों तथा वित्तीय लेनदेन की जांच की जा रही है।
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