परीक्षा से बाहर निकाले गए छात्र ने लिखा था ‘अपोलॉजी लेटर’, फिर कमरे में पहुंचकर उठाया खौफनाक कदम

राहुल गुप्ता
मुंबई, 1 अक्टूबर। आईआईटी बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की 18 सितंबर को आत्महत्या के बाद परीक्षा में कथित नकल के आरोप, उन्हें परीक्षा हॉल से बाहर निकाले जाने और उनसे लिखित ‘अपोलॉजी लेटर’ लिए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, परीक्षा हॉल से बाहर निकाले जाने के बाद साहिल को अधिकारियों के पास ले जाया गया था, जहां उन्होंने कथित तौर पर परीक्षा में नकल करने की बात स्वीकार करते हुए लिखित माफी पत्र दिया था।

हालांकि, आईआईटी बॉम्बे के अप्रैल 2015 में तय किए गए अकादमिक कदाचार से जुड़े नियमों में ऐसे मामले में छात्र से ‘अपोलॉजी लेटर’ लेने का कोई प्रावधान नहीं है। नियमों के मुताबिक, परीक्षा के दौरान कदाचार मिलने पर निगरानी करने वाले शिक्षक को संबंधित सामग्री जब्त करनी होती है और छात्र को नई उत्तर पुस्तिका देकर परीक्षा जारी रखने की अनुमति दी जानी चाहिए।

परीक्षा हॉल से बाहर निकाले जाने के बाद क्या हुआ?

एक सूत्र के मुताबिक, साहिल को करीब 12:38 बजे परीक्षा हॉल से बाहर जाने के लिए कहा गया। इसके बाद उन्हें वरिष्ठ अधिकारियों के पास ले जाया गया, जहां उन्होंने कथित तौर पर नकल के संबंध में लिखित माफी पत्र पर हस्ताक्षर किए।

सीसीटीवी फुटेज के अनुसार, साहिल करीब 1:25 बजे अपने हॉस्टल के कमरे में पहुंचे। इसके बाद वह कमरे से बाहर नहीं निकले और बाद में उनकी मौत की जानकारी सामने आई।

आईआईटी बॉम्बे के नियम क्या कहते हैं?

आईआईटी बॉम्बे की अकादमिक कदाचार से निपटने की प्रक्रिया के मुताबिक, परीक्षा के दौरान यदि निगरानी करने वाले शिक्षक को छात्र द्वारा अनुशासनहीनता या नकल का मामला मिलता है, तो संबंधित सामग्री जैसे पर्ची, मोबाइल फोन या उत्तर पुस्तिका जब्त की जानी चाहिए।

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इसके बाद छात्र को नई उत्तर पुस्तिका दी जानी चाहिए और उसे परीक्षा जारी रखने की अनुमति दी जानी चाहिए। मामले पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करके संबंधित विभागाध्यक्ष को भेजी जाती है। इसके बाद विभागीय अकादमिक अनुशासन समिति मामले में उपलब्ध सबूतों की जांच करती है।

नियमों के मुताबिक, समिति का मुख्य काम सबूतों की जांच कर यह तय करना है कि वास्तव में किस तरह का अकादमिक कदाचार हुआ है। यदि सबूत स्पष्ट नहीं हैं, तो संदेह का लाभ छात्र को दिया जाना चाहिए। समिति की सिफारिश विभागाध्यक्ष के माध्यम से डीन, अकादमिक कार्यक्रम को भेजी जाती है।

साहिल की मौत के बाद प्रदर्शन कर रहे छात्रों का आरोप है कि उनके मामले में तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। छात्रों ने सवाल उठाया है कि नियमों के मुताबिक उन्हें नई उत्तर पुस्तिका देकर परीक्षा जारी रखने का मौका क्यों नहीं दिया गया और उन्हें परीक्षा कक्ष से बाहर क्यों ले जाया गया।

‘अपोलॉजी लेटर’ को लेकर भी उठे सवाल

आईआईटी बॉम्बे के केंद्रीय प्रशासन द्वारा विभागों में इन नियमों के पालन की निगरानी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि अलग-अलग विभागों में अकादमिक कदाचार से जुड़े मामलों को संभालने की प्रक्रिया अलग हो सकती है।

इसी के चलते छात्रों की ओर से परीक्षा में अकादमिक कदाचार के मामलों के लिए एक समान मानक संचालन प्रक्रिया यानी एसओपी बनाने की मांग की जा रही है। साहिल की मौत के बाद परीक्षाएं भी स्थगित कर दी गई थीं। बाकी मिड-सेमेस्टर परीक्षाएं एसओपी तैयार होने के बाद आयोजित किए जाने की बात सामने आई है।

मामले में आईआईटी बॉम्बे से साहिल के अपोलॉजी लेटर को लेकर जवाब मांगा गया था, लेकिन खबर लिखे जाने तक संस्थान की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली थी।

पुलिस जांच में अब तक क्या सामने आया?

साहिल की मौत की जांच कर रही अपराध शाखा के मुताबिक, हॉस्टल लौटने के करीब एक घंटे बाद साहिल ने एक दोस्त से फोन पर बात की थी। यह बातचीत करीब 1:25 बजे हुई थी।

पुलिस के अनुसार, बातचीत के दौरान साहिल ने पहले पेपर में कम अंक आने का जिक्र किया और कथित तौर पर कहा कि वह उन अंकों की भरपाई के लिए परीक्षा में नकल कर रहा था। दोस्त के बयान के मुताबिक, इसके बाद जब साहिल ने बार-बार फोन करने पर जवाब नहीं दिया तो उसने हॉस्टल के पास रहने वाले अन्य छात्रों को इसकी जानकारी दी।

पुलिस ने साहिल के माता-पिता, उनकी कक्षा के छात्रों और उनके परिचितों के बयान दर्ज किए हैं। जांच टीम ने परीक्षा हॉल और लॉबी के सीसीटीवी फुटेज भी जुटाए हैं।

मुंबई पुलिस की ओर से गठित विशेष जांच दल यानी एसआईटी ने संस्थान से मामले से जुड़े सभी दस्तावेज सौंपने को कहा है। एक अधिकारी के मुताबिक, जांच में यह देखा जा रहा है कि क्या किसी प्रोफेसर की कार्रवाई का साहिल की मौत से कोई संबंध था और क्या उनके साथ जाति के आधार पर किसी तरह का भेदभाव हुआ था। पुलिस ने यह भी कहा है कि मामले में अपनाई गई प्रक्रिया की जांच की जाएगी।

पवई पुलिस ने प्रोफेसर सूर्यनारायण डूल्ला के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने और एससी/एसटी एक्ट की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की थी। बाद में जांच अपराध शाखा को सौंप दी गई। अभी जांच जारी है।

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