मुंबई, 01 अक्टूबर। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना की ओर से निकाले जा रहे मोर्चे को लेकर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता नवनाथ बन ने इसे ‘गर्जना मोर्चा’ के बजाय ‘गजकर्ण मोर्चा’ करार देते हुए विपक्षी दलों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सूखे की स्थिति में किसानों के साथ खड़े होने की जरूरत है और मोर्चे पर होने वाले खर्च के बजाय जरूरतमंद किसानों की मदद की जानी चाहिए।
एसआईआर को लेकर दोहरे मापदंड का आरोप
भाजपा प्रदेश कार्यालय में गुरुवार को आयोजित पत्रकार परिषद में बन ने एसआईआर को लेकर विपक्ष के रुख पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एसआईआर की प्रक्रिया केवल बिहार में नहीं, बल्कि केरल में भी हुई थी। उनके अनुसार, जहां किसी दल को चुनावी लाभ मिलता है, वहां एसआईआर को सही और जहां परिणाम उसके विपरीत होते हैं, वहां गलत बताना दोहरे मापदंड को दर्शाता है। यह नवनाथ बन का राजनीतिक आरोप है।
मोर्चे के खर्च को लेकर सवाल
बन ने कहा कि यदि राज्यभर से प्रदर्शनकारी मुंबई आते हैं तो पेट्रोल-डीजल, वाहनों और अन्य व्यवस्थाओं पर बड़ी राशि खर्च होगी। उन्होंने कहा कि इस राशि का उपयोग जरूरतमंद किसानों की सहायता के लिए किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, सरकार संकट की स्थिति में किसानों के साथ खड़ी है।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि मोर्चा लोकतंत्र बचाने के लिए है, तो केरल, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना में कांग्रेस की सरकारों तथा तमिलनाडु में टीवीके की सरकार के संदर्भ में विपक्ष का क्या रुख है।
इंडिया गठबंधन पर भी साधा निशाना
बन ने इंडिया गठबंधन की एकजुटता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि गठबंधन किसी एक वैचारिक मुद्दे पर आधारित नहीं है और अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग राजनीतिक दल अपने हितों के अनुसार काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हाल में हुई इंडिया गठबंधन की बैठक में आम आदमी पार्टी और डीएमके शामिल नहीं थे। चार दिन पहले कांग्रेस द्वारा मुंबई में अलग आंदोलन किए जाने का उल्लेख करते हुए उन्होंने गठबंधन के भीतर समन्वय पर सवाल उठाया।
उन्होंने आरोप लगाया कि उबाठा गुट का इंडिया गठबंधन में ‘इस्तेमाल करो और फेंक दो’ जैसा व्यवहार किया जा रहा है। यह भी उनका राजनीतिक आरोप है।
आदित्य ठाकरे और मनसे पर टिप्पणी
बन ने आदित्य ठाकरे को अपने संगठन के भीतर की स्थिति पर ध्यान देने की सलाह दी। उन्होंने वरली में पार्टी की स्थिति को लेकर भी टिप्पणी की। मनसे को लेकर उन्होंने कहा कि अमित ठाकरे की हार के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराने के बजाय पार्टी को अपने राजनीतिक निर्णयों की समीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने मनसे से चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा निकालने के बजाय उबाठा के विधायक के खिलाफ आंदोलन करने की सलाह दी।
रोहित पवार के दावों पर सबूत मांगने की चुनौती
अजित पवार से जुड़े मामले को लेकर रोहित पवार के बयानों पर भी बन ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि रोहित पवार ने अब तक अपने दावों के समर्थन में कोई सबूत सार्वजनिक नहीं किया है। बन ने कहा कि यदि उनके पास किसी मामले से संबंधित ठोस प्रमाण और संबंधित लोगों के नाम हैं, तो उन्हें सार्वजनिक करना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि वह आगामी दिनों में इस मुद्दे पर कुछ खुलासे करेंगे।
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