सिप्ला के पुणे गोदाम पर एफडीए का बड़ा एक्शन, दवा लाइसेंस रद्द; जांच में सामने आईं कई गंभीर खामियां

राहुल गुप्ता
पुणे, 2 अक्टूबर। महाराष्ट्र के पुणे में वडकी स्थित मेसर्स सिप्ला फार्मा एंड लाइफ साइंसेज लिमिटेड के सीएंडएफ गोदाम का दवा बिक्री और वितरण लाइसेंस खाद्य एवं औषधि प्रशासन यानी एफडीए ने रद्द कर दिया है। जांच के दौरान ‘रिएक्टिन प्लस’ दवा के पैकेट पर भ्रामक दावे और मानव आकृति के इस्तेमाल के अलावा दवाओं के भंडारण, स्वच्छता, रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में भी गंभीर अनियमितताएं सामने आईं।

यह कार्रवाई मुंबई हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद कंपनी को सुनवाई का पूरा अवसर देने के बाद की गई। एफडीए ने 4 सितंबर को संशोधित कारण बताओ नोटिस जारी किया था। कंपनी ने 11 सितंबर को लिखित जवाब दिया और 21 सितंबर को व्यक्तिगत सुनवाई हुई। इसके बाद जांच के निष्कर्ष, कंपनी के जवाब और संबंधित कानूनी प्रावधानों पर विचार करने के बाद लाइसेंस प्राधिकरण ने लाइसेंस रद्द करने का आदेश जारी किया।

दवा के पैकेट पर किए गए दावों पर उठे सवाल

जांच के दौरान ‘रिएक्टिन प्लस’ अनुसूची ‘एच’ में शामिल दवा पाई गई। इसके पैकेट पर सिरदर्द, मांसपेशियों और जोड़ों के दर्द, कमर दर्द, शरीर में दर्द और दांत दर्द से तुरंत राहत मिलने जैसे दावे किए गए थे।

पैकेट पर मानव आकृति के जरिए मांसपेशियों के दर्द से राहत का चित्रण भी किया गया था। एफडीए के अनुसार, दवा के लेबल पर किए गए ये दावे और चित्रण संबंधित वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप नहीं थे।

जमीन पर रखे मिले दवाओं के बॉक्स

गोदाम की जांच में भंडारण व्यवस्था को लेकर भी कई खामियां सामने आईं। निरीक्षण के लिए जरूरी ‘फॉर्म-35’ निरीक्षण पुस्तक उपलब्ध नहीं थी। दवाओं के बॉक्स पैलेट या रैक पर रखने के बजाय सीधे जमीन पर रखे मिले। स्टॉक पर धूल भी जमा थी।

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एक्सपायरी दवाओं को रखने के लिए अलग क्षेत्र और स्पष्ट सूचना-पट्ट नहीं था। ऐसी दवाओं के निपटारे की निर्धारित प्रक्रिया से जुड़े जरूरी रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं मिले।

इसके अलावा खरीद और बिक्री की रसीदों में भी खामियां मिलीं। कंप्यूटर रिकॉर्ड में दर्ज स्टॉक और वास्तविक दवा स्टॉक में अंतर पाया गया। इस अंतर में एंटीबायोटिक दवाएं भी शामिल थीं।

विक्रेता की भी होती है कानूनी जिम्मेदारी

कंपनी की ओर से अपने जवाब में उत्पादक की जिम्मेदारी का हवाला दिया गया था। हालांकि, लाइसेंस प्राधिकरण ने कहा कि दवा बाजार में लाने वाले विक्रेता की भी स्वतंत्र वैधानिक जिम्मेदारी होती है। केवल निर्माता की जिम्मेदारी बताकर बिक्री और वितरण से जुड़े कानूनी अनुपालन से बचा नहीं जा सकता।

एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे ने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि दवाओं की सुरक्षा, गुणवत्ता और आपूर्ति श्रृंखला में कानूनी अनुपालन सुनिश्चित करना है। उनके मुताबिक, हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए कंपनी को सुनवाई का अवसर दिया गया और प्राकृतिक न्याय, पारदर्शिता तथा कारणयुक्त निर्णय की प्रक्रिया पूरी करने के बाद आदेश जारी किया गया।

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