2,008 वर्ग किमी क्षेत्र और 565 गांवों का डिजिटल सर्वेक्षण
मुंबई, 03 अक्टूबर। मुंबई महानगर क्षेत्र के भविष्य के विकास की योजना को आधार देने के लिए मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) ने मुंबई 3.0 और मुंबई 4.0 से जुड़े तीन मौजूदा भूमि उपयोग (ELU) रिपोर्ट तैयार की हैं। प्राधिकरण के अनुसार, यह कार्य करीब ढाई महीने में पूरा किया गया। तीनों रिपोर्टों में कुल 565 गांवों और लगभग 2,008 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को शामिल किया गया है।
तीन क्षेत्रों का सर्वेक्षण
इन रिपोर्टों में केएससी नया नगर, पालघर का उत्तरी विस्तारित अधिसूचित क्षेत्र (Northern ENA) और रायगढ़ के अलीबाग सहित दक्षिणी विस्तारित अधिसूचित क्षेत्र (Southern ENA) शामिल हैं। एमएमआरडीए के अनुसार, इन रिपोर्टों से मौजूदा भूमि उपयोग, बुनियादी ढांचे, प्राकृतिक संसाधनों और विकास के स्वरूप की विस्तृत जानकारी उपलब्ध हुई है, जिसका इस्तेमाल आगे की नियोजन प्रक्रिया में किया जा सकेगा।
केएससी नया नगर के तहत पेन, उरण और पनवेल तालुकों के 124 गांवों का करीब 324 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र शामिल है। नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, जेएनपीए, अटल सेतु और प्रस्तावित विरार-अलीबाग मल्टी-मोडल कॉरिडोर जैसी परियोजनाओं के कारण इस क्षेत्र में शहरी, औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों के विस्तार की संभावनाएं बताई गई हैं। हालांकि, इसके साथ कृषि भूमि और पर्यावरणीय संसाधनों के संरक्षण की चुनौती भी बनी रहेगी।
पालघर और अलीबाग में विकास के साथ संरक्षण की चुनौती
पालघर के उत्तरी ENA में करीब 1,007 वर्ग किलोमीटर और 224 गांवों का अध्ययन किया गया है। यहां वन क्षेत्र, नदियां, कृषि भूमि, समुद्र तट, मैंग्रोव, आर्द्रभूमि और आदिवासी बस्तियां मौजूद हैं। वहीं, तारापुर औद्योगिक क्षेत्र तथा सड़क-रेल संपर्क के कारण औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों के विस्तार की संभावना है। ऐसे में औद्योगिक विकास के साथ कृषि, आदिवासी आजीविका, तटीय क्षेत्र और बाढ़ प्रबंधन के बीच संतुलन महत्वपूर्ण होगा।
अलीबाग के दक्षिणी ENA में करीब 677 वर्ग किलोमीटर और 217 गांव शामिल हैं। समुद्र तट, किले और प्राकृतिक क्षेत्रों के अलावा यहां औद्योगिक तथा परिवहन गतिविधियां भी मौजूद हैं। भविष्य के विकास में पर्यटन और रोजगार के अवसरों के साथ तटीय एवं पर्यावरणीय संरक्षण को ध्यान में रखना होगा।
डिजिटल तकनीक से तैयार हुआ डेटाबेस
एमएमआरडीए के अनुसार, ELU रिपोर्ट तैयार करने में एरियल LiDAR, हाई-रिजॉल्यूशन इमेजरी, DGPS, GIS मैपिंग, कैडस्ट्रल रिकॉर्ड और जमीनी सत्यापन जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया। इससे भूमि उपयोग और प्राकृतिक संसाधनों की अधिक विस्तृत डिजिटल जानकारी तैयार हुई है।
प्राधिकरण इस डेटाबेस को भविष्य में डिजिटल ट्विन और सिनेरियो मॉडलिंग से जोड़ने की योजना बना रहा है। इसके जरिए सड़क, सार्वजनिक परिवहन, बुनियादी ढांचे, जल निकासी और बाढ़ जोखिम पर अलग-अलग विकास विकल्पों के संभावित प्रभावों का आकलन किया जा सकेगा।
आवास और रोजगार के साथ पर्यावरण पर जोर

एमएमआरडीए का कहना है कि भविष्य की नियोजन प्रक्रिया में रोजगार केंद्रों, औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स हब तथा आवासीय क्षेत्रों के बीच बेहतर संपर्क विकसित करने पर ध्यान दिया जाएगा। सार्वजनिक परिवहन के निकट आवास, स्कूल, अस्पताल और अन्य सुविधाओं की योजना बनाने से यात्रा की जरूरत कम करने और सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
रिपोर्टों के अनुसार, संयुक्त अध्ययन क्षेत्र का करीब 45 प्रतिशत हिस्सा वन एवं हरित क्षेत्रों की श्रेणियों में आता है। इसलिए मैंग्रोव, आर्द्रभूमि, नदियों, जलाशयों और प्राकृतिक जल निकासी प्रणालियों के संरक्षण को नियोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है। हालांकि, वास्तविक विकास संबंधी निर्णय संबंधित वैधानिक प्रक्रियाओं और पर्यावरणीय आकलन के बाद ही लिए जाएंगे।
भविष्य की मास्टर प्लानिंग का आधार
एमएमआरडीए के अनुसार, इन ELU रिपोर्टों का उपयोग केएससी नया नगर की मास्टर प्लानिंग तथा पालघर और दक्षिणी ENA की GIS आधारित विकास योजनाओं में किया जाएगा। प्राधिकरण का लक्ष्य महानगरीय क्षेत्र में विकास को अधिक विकेंद्रीकृत और समन्वित बनाना है, ताकि रोजगार, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवहन सुविधाएं अलग-अलग क्षेत्रों में विकसित हो सकें।
एमएमआरडीए महानगर आयुक्त डॉ. संजय मुखर्जी ने कहा कि ELU डेटाबेस को भविष्य में परिवहन, बुनियादी ढांचे और विभिन्न विकास विकल्पों की मॉडलिंग के लिए व्यावहारिक नियोजन उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि लक्ष्य ऐसे परस्पर जुड़े विकास केंद्र तैयार करना है, जहां लोगों को काम, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य सुविधाओं तक बेहतर पहुंच मिल सके।
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