सभी क्षेत्रीय रेलों में सर्वाधिक
मुंबई, 04 अक्टूबर। मध्य रेल ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में अप्रैल से सितंबर तक 323.50 करोड़ रुपये की स्क्रैप बिक्री दर्ज कर सभी क्षेत्रीय रेलों में पहला स्थान हासिल किया है। सितंबर 2026 में ही 70.42 करोड़ रुपये की स्क्रैप बिक्री हुई, जो मध्य रेल द्वारा एक महीने में की गई अब तक की सर्वाधिक बिक्री है।
‘स्वच्छता ही सेवा’ के तहत 44.24 करोड़ रुपये का स्क्रैप निस्तारित
रेल मंत्रालय की ओर से 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक ‘स्वच्छता में सहभागिता; स्वच्छ भारत, विकसित भारत’ थीम पर ‘स्वच्छता ही सेवा 2026’ अभियान चलाया गया। इसके तहत मध्य रेल के सामग्री प्रबंधन विभाग ने रेलवे परिसरों में जमा स्क्रैप और अनुपयोगी परिसंपत्तियों की पहचान, पृथक्करण और निस्तारण के लिए विशेष अभियान चलाया।
17 सितंबर से शुरू हुए अभियान के दौरान 4,884 मीट्रिक टन स्क्रैप का निस्तारण किया गया, जिसकी कीमत 44.24 करोड़ रुपये है। इससे रेलवे परिसरों की स्वच्छता में सुधार के साथ ‘जीरो स्क्रैप मिशन’ को भी मजबूती मिली।
ई-कचरे का भी किया जा रहा निस्तारण
मध्य रेल ने अनुपयोगी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और अन्य ई-कचरे के निस्तारण पर भी विशेष ध्यान दिया है। चालू वित्तीय वर्ष में सितंबर 2026 तक 1.11 करोड़ रुपये मूल्य के ई-कचरे की बिक्री की जा चुकी है। कुल 46.85 मीट्रिक टन ई-कचरे का निस्तारण किया गया।
रेलवे पी-वे सामग्री से लेकर रोलिंग स्टॉक तक शामिल
वित्तीय वर्ष 2026-27 में मध्य रेल द्वारा बड़े पैमाने पर विभिन्न प्रकार की अनुपयोगी परिसंपत्तियों का निस्तारण किया गया। इसमें 29,993 मीट्रिक टन रेल पी-वे स्क्रैप, 1,72,195 स्लीपर, 15,547 मीट्रिक टन लौह स्क्रैप और 1,999 मीट्रिक टन अलौह स्क्रैप शामिल हैं।
इसके अलावा 23 लोकोमोटिव, 62 कोच और 70 वैगन भी निस्तारित किए गए। अभियान में आईसीएफ कोच, रेल सामग्री, स्लीपर तथा अन्य अनुपयोगी रेलवे परिसंपत्तियों को भी शामिल किया गया।
भुसावल मंडल सबसे आगे
323.50 करोड़ रुपये की संचयी स्क्रैप बिक्री में विभिन्न मंडलों का उल्लेखनीय योगदान रहा। भुसावल मंडल ने 57.27 करोड़ रुपये, मुंबई मंडल ने 52.08 करोड़ रुपये, पुणे मंडल ने 47.55 करोड़ रुपये, नागपुर मंडल ने 46.08 करोड़ रुपये और सोलापुर मंडल ने 14.69 करोड़ रुपये की स्क्रैप बिक्री दर्ज की। शेष राशि मध्य रेल के अन्य डिपो से प्राप्त हुई।
कचरे को संपदा में बदलने पर जोर
मध्य रेल के अनुसार, स्क्रैप के व्यवस्थित निस्तारण से रेलवे को राजस्व प्राप्त होने के साथ यार्ड, कार्यशालाओं, डिपो और ट्रैक किनारे के क्षेत्रों में स्वच्छता एवं सुरक्षा बेहतर होती है। इससे स्क्रैप से घिरी मूल्यवान भूमि और स्थान भी दोबारा उपयोग के लिए उपलब्ध होते हैं।
‘जीरो स्क्रैप मिशन’ के तहत अनुपयोगी सामग्री को राजस्व अर्जित करने वाली परिसंपत्ति में बदलने के साथ पुनर्चक्रण और चक्रीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। मध्य रेल ने सभी मंडलों और डिपो में स्क्रैप की पहचान, पृथक्करण और वैज्ञानिक निस्तारण जारी रखते हुए ‘जीरो स्क्रैप स्थिति’ हासिल करने की दिशा में अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।
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