भाजपा प्रवक्ता नवनाथ बन ने वीडियो दिखाकर आंदोलन पर उठाए सवाल
न्यूज़म ब्यूरो
पुणे, 5 अक्टूबर। महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (एमपीएससी) की मांगों को लेकर विधायक रोहित पवार के नेतृत्व में पुणे में चल रहे आंदोलन को लेकर भाजपा ने सवाल उठाए हैं। भाजपा के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता नवनाथ बन ने आरोप लगाया कि यह आंदोलन छात्रों का आंदोलन न होकर राजनीतिक प्रदर्शन बन गया है। सोमवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित पत्रकार परिषद में उन्होंने आंदोलन स्थल के वीडियो दिखाते हुए दावा किया कि वहां पुणे के बाहर से राजनीतिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में वाहन पहुंचे थे।
बाहर से कार्यकर्ताओं को बुलाने का आरोप
नवनाथ बन ने दावा किया कि आंदोलन के शुरुआती चार दिनों में छात्रों की अपेक्षित भागीदारी नहीं थी। इसके बाद पुणे के बाहर से राजनीतिक कार्यकर्ताओं को बुलाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इन कार्यकर्ताओं में रोहित पवार से संबंधित संस्थानों के कर्मचारी तथा कांग्रेस के कार्यकर्ता भी शामिल थे। उनके अनुसार, राजनीतिक दलों के झंडे और स्टिकर लगी करीब 200 से 250 गाड़ियां आंदोलन स्थल पर पहुंचीं। भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि भीड़ जुटाने के लिए कार्यकर्ताओं को भुगतान किया गया, हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि उन्होंने प्रस्तुत नहीं की।
एमपीएससी अध्यक्ष को हटाने की मांग पर सवाल
बन ने रोहित पवार की ओर से एमपीएससी अध्यक्ष विवेक भीमनवार को हटाने की मांग पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जिस पेपर लीक मामले को लेकर आंदोलन किया जा रहा है, वह भीमनवार के कार्यकाल से संबंधित नहीं है। उन्होंने दावा किया कि मामले में छह लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और संबंधित सचिव के तबादले की मांग भी पूरी की जा चुकी है।
मुख्यमंत्री से चर्चा के बाद आंदोलन पर सवाल
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विभिन्न प्रतिनिधिमंडलों से मुलाकात कर उनकी मांगों पर चर्चा की थी। उनके अनुसार, रोहित पवार के साथ आंदोलन कर रहे प्रतिनिधियों से भी मुख्यमंत्री ने बातचीत की थी। बन ने सवाल उठाया कि जब सरकार की ओर से संबंधित मांगों पर चर्चा की जा चुकी है, तो आंदोलन जारी रखने का उद्देश्य क्या है।
आदिवासी छात्रों के मुद्दे पर भी कांग्रेस को घेरा
नवनाथ बन ने आदिवासी छात्रों से जुड़े मुद्दे को लेकर कांग्रेस पर भी निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि मुंबई में किसी आदिवासी छात्र को पुलिस ने हिरासत में नहीं लिया और न ही गिरफ्तार किया। उनके अनुसार, मुख्यमंत्री ने आदिवासी छात्रों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात कर उनकी मांगों पर चर्चा की, जिसके बाद प्रतिनिधिमंडल नासिक लौट गया।
बन ने कहा कि राजनीतिक दलों को अपनी राजनीति अपने कार्यकर्ताओं के माध्यम से करनी चाहिए और छात्रों के भविष्य को राजनीतिक विवाद का हिस्सा नहीं बनाना चाहिए। उन्होंने सरकार की ओर से आदिवासी छात्रों के हित में किए गए फैसलों का उल्लेख करते हुए कांग्रेस के शासनकाल पर भी आरोप लगाए।
ओमराजे निंबाळकर के दौरे को लेकर भी विवाद
बन ने शिवसेना सांसद ओमराजे निंबाळकर के आंदोलन स्थल पर पहुंचने का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए नारे छात्रों ने नहीं, बल्कि कुछ राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने लगाए थे। उन्होंने सवाल किया कि यदि निंबाळकर आंदोलन को समर्थन देने पहुंचे थे, तो उनके सामने एमपीएससी से जुड़ी मांगें क्यों नहीं रखी गईं।
भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि आंदोलन में राजनीतिक कार्यकर्ताओं की मौजूदगी के कारण छात्रों से जुड़े मूल मुद्दे पीछे छूट रहे हैं। हालांकि, आंदोलन से जुड़े पक्षों की ओर से इन आरोपों पर अलग-अलग प्रतिक्रिया सामने आ सकती है।
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