बाणगंगा तालाब में मछलियों की मौत के बाद बड़ा फैसला, अब पिंडदान के लिए बनेंगे 10 कृत्रिम तालाब

पिंडदान सामग्री से पानी में ऑक्सीजन की कमी रोकने के लिए कृत्रिम तालाबों के साथ अतिरिक्त पंप लगाने का भी फैसला

राहुल गुप्ता

मुंबई, 6 अक्टूबर।
दक्षिण मुंबई के करीब 900 वर्ष पुराने ऐतिहासिक बाणगंगा तालाब में शनिवार को बड़ी संख्या में मछलियां मृत मिलने के बाद प्रशासन ने पानी और जलजीवन को सुरक्षित रखने के लिए कई अहम फैसले लिए हैं। स्थानीय निवासियों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं की चिंता के बाद सोमवार को पालक मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा, नगरसेवक सन्नी रविंद्र सानप और स्थानीय बीएमसी अधिकारियों की बैठक हुई।

बैठक में तय किया गया कि पिंडदान के लिए तालाब के आसपास 10 कृत्रिम तालाब बनाए जाएंगे। इसके साथ ही बाणगंगा के पानी में ऑक्सीजन का स्तर बनाए रखने के लिए एक अतिरिक्त पंप लगाया जाएगा। पंप के जरिए पानी का रोटेशन जारी रखने की व्यवस्था की जाएगी, ताकि पानी में पर्याप्त ऑक्सीजन बनी रहे।

पिंडदान के लिए अलग व्यवस्था

नगरसेवक सन्नी सानप ने बताया कि बाणगंगा तालाब को प्रदूषण से बचाने के लिए 3 प्रमुख फैसले लिए गए हैं। इनमें पिंडदान के लिए कृत्रिम तालाब बनाना, पानी में ऑक्सीजन का स्तर बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पंप लगाना और धर्मगुरुओं के साथ बैठक कर लोगों से कृत्रिम तालाबों में ही पिंडदान करने का अनुरोध करना शामिल है।

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पितृपक्ष की शेष अवधि के दौरान और इसके बाद भी तालाब परिसर में स्वच्छता बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का प्रयास है कि धार्मिक गतिविधियों के कारण तालाब के पानी की गुणवत्ता प्रभावित न हो।

पानी में ऑक्सीजन कम होने का प्राथमिक अनुमान

पिछले कई वर्षों से बाणगंगा तालाब में पिंडदान के दौरान पानी दूषित होने और मछलियों के मरने की घटनाएं सामने आती रही हैं। इस वर्ष बढ़ती गर्मी के साथ तालाब में बड़ी मात्रा में पिंडदान सामग्री, आटे के गोले, तेल और अबीर-गुलाल डाले जाने के कारण पानी में ऑक्सीजन का स्तर कम होने का प्राथमिक अनुमान लगाया जा रहा है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, पानी में डाले गए जैविक पदार्थों के विघटन के दौरान बड़ी मात्रा में ऑक्सीजन की खपत होती है। इससे पानी में घुली ऑक्सीजन कम हो सकती है और मछलियों को सांस लेने में परेशानी होने लगती है।

पानी के नमूने जांच के लिए भेजे जाएंगे

बीएमसी डी वार्ड के सहायक आयुक्त संतोष सालुंखे ने बताया कि तालाब के पानी की गुणवत्ता की जांच के लिए नमूने प्रयोगशाला भेजे जाते हैं। मौजूदा मामले में भी पानी के नमूनों की जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि पिंडदान के दौरान पानी में ऑक्सीजन की कमी होने से मछलियों के जीवन पर संकट पैदा हो सकता है।

पालक मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने नागरिकों से धार्मिक परंपराओं का पालन पर्यावरण अनुकूल तरीके से करने और किसी भी प्रकार की सामग्री तालाब में नहीं डालने की अपील की। उन्होंने कहा कि बाणगंगा केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि ऐतिहासिक धरोहर भी है। इसकी पवित्रता, स्वच्छता और जलजीवन को सुरक्षित रखना प्रशासन के साथ नागरिकों की भी सामूहिक जिम्मेदारी है।

नगरसेवक सन्नी रविंद्र सानप ने कहा कि बाणगंगा को पर्यावरण की दृष्टि से सुरक्षित रखने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। धर्मगुरुओं से भी पिंडदान कृत्रिम तालाबों में कराने का अनुरोध किया गया है, जबकि पानी में ऑक्सीजन का स्तर बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पंप लगाने की व्यवस्था की जाएगी।

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