‘पार्टिसिपेट मुंबई’ से जनभागीदारी को मिलेगी नई दिशा : फडणवीस

मनपा की सेवाओं में आएगी तेजी, ‘समग्र’ के सहयोग से प्रशासनिक प्रक्रियाओं का होगा पुनर्गठन, नए सुविधा केंद्रों के लिए 25 करोड़ रुपए का सीआरएस

न्यूज़म ब्यूरो

मुंबई, 6 अक्टूबर। मुंबई के विकास में नागरिकों, उद्योग जगत, स्वयंसेवी संस्थाओं और विशेषज्ञों की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से बृहन्मुंबई महानगरपालिका ने ‘पार्टिसिपेट मुंबई’ नामक नया डिजिटल मंच शुरू किया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को इसका लोकार्पण किया। इस अवसर पर मनपा की सेवा वितरण व्यवस्था में सुधार और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए ‘समग्र’ संस्था के साथ समझौता भी किया गया।

विकास कार्यों में नागरिक बनेंगे भागीदार

मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि ‘पार्टिसिपेट मुंबई’ केवल कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) के तहत धन जुटाने का मंच नहीं है, बल्कि सरकार, महानगरपालिका, कॉरपोरेट क्षेत्र और सामाजिक संस्थाओं को एक साथ लाकर विकास कार्यों में भागीदार बनाने का माध्यम है। मंच पर मनपा की ऐसी विभिन्न परियोजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी, जिनमें बाहरी भागीदारी की जरूरत है।

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शिक्षा, स्वास्थ्य, पानी, रोजगार, पर्यावरण, उद्यान, सौंदर्यीकरण और गरीबी उन्मूलन जैसे क्षेत्रों में काम करने वाली कंपनियां, स्वयंसेवी संस्थाएं और नागरिक अपनी पसंद की परियोजना चुन सकेंगे। संस्थाएं अपनी योजनाएं भी इस मंच पर प्रस्तुत कर सकेंगी।

सीएसआर में राशि नहीं, परिणाम महत्वपूर्ण

फडणवीस ने कहा कि सीएसआर के तहत कितना पैसा खर्च हुआ, इससे ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि उससे कितने लोगों को लाभ मिला और क्या परिणाम हासिल हुआ। सीएसआर संस्थाओं के माध्यम से सरकार को नई तकनीक, आधुनिक प्रबंधन पद्धतियों और प्रभावी निगरानी व्यवस्था का लाभ मिल सकता है। सरकारी व्यवस्था और सीएसआर भागीदारों के बेहतर तालमेल से विकास कार्य अधिक प्रभावी हो सकते हैं।

उन्होंने मुंबई में कुपोषण की समस्या पर भी ध्यान देने की जरूरत बताई। विशेष रूप से झुग्गी बस्तियों और गरीब इलाकों के बच्चों तक पोषण पहुंचाने के लिए सीएसआर का प्रभावी उपयोग किया जा सकता है।

प्रशासनिक प्रक्रियाओं में होगा बदलाव

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘समग्र’ के साथ समझौते का उद्देश्य मनपा प्रशासन को अधिक तेज, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाना है। कई सरकारी प्रक्रियाएं वर्षों पहले तैयार की गई थीं और अब भी उसी तरीके से चल रही हैं। वर्तमान समय में नागरिकों को त्वरित सेवाएं और समस्याओं का जल्द समाधान चाहिए। इसलिए अनावश्यक चरणों को कम कर ‘बिजनेस प्रोसेस री-इंजीनियरिंग’ की जरूरत है।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने करीब 1,100 सेवाएं ऑनलाइन करने का प्रयास किया है। विश्लेषण में करीब 200 सेवाओं का नागरिकों द्वारा उपयोग नहीं किए जाने की बात सामने आई। वहीं करीब 45 से 47 प्रमुख सेवाओं की प्रक्रिया में सुधार कर लगभग 90 प्रतिशत नागरिकों को बेहतर और तेज सेवा देने की संभावना है।

एआई से निर्माण अनुमति प्रक्रिया होगी आसान

फडणवीस ने बताया कि मनपा के निर्माण विभाग में निर्माण योजनाओं की जांच के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित प्रणाली शुरू की गई है। भविष्य में मानवीय हस्तक्षेप को न्यूनतम करने का लक्ष्य रखा जाना चाहिए। इससे मुंबई में कारोबार करना आसान बनाने में मदद मिलेगी।

10 सुविधा केंद्रों के लिए 25 करोड़ का सीएसआर

महापौर रितू तावडे ने कहा कि ‘पार्टिसिपेट मुंबई’ के माध्यम से जनभागीदारी को संस्थागत स्वरूप मिलेगा। उन्होंने कहा कि सीएसआर केवल धन देने तक सीमित न रहकर वास्तविक बदलाव का माध्यम बनना चाहिए।

मनपा आयुक्त अश्विनी भिडे ने कहा कि मंच के माध्यम से उद्योग, स्वयंसेवी संस्थाएं, विशेषज्ञ और नागरिक धन, वस्तुरूप सहायता, विशेषज्ञता या स्वयंसेवा के जरिए विभिन्न परियोजनाओं से जुड़ सकेंगे।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री फडणवीस के हाथों ‘पार्टिसिपेट मुंबई’ और ‘समग्र’ की सूचना पुस्तिका का अनावरण किया गया। साथ ही मुंबई में बनाए जाने वाले 10 नए सुविधा केंद्रों के लिए हिंदुस्तान यूनिलीवर की ओर से सीएसआर के तहत 25 करोड़ रुपये मनपा को सौंपे गए। कार्यक्रम में मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा, उपमहापौर संजय घाडी सहित मनपा पदाधिकारी, अधिकारी और उद्योग व स्वयंसेवी क्षेत्र के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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