735 अधिकारी-कर्मचारी प्रतिनियुक्ति पर पहुंचे थे, करीब 500 की वापसी के बाद बाकी कर्मचारियों की स्थिति स्पष्ट करने में जुटा सामान्य प्रशासन विभाग
राहुल गुप्ता
मुंबई, 7 अक्टूबर।
महाराष्ट्र सरकार के मंत्री कार्यालयों में प्रतिनियुक्ति पर तैनात कर्मचारियों को उनके मूल विभाग में वापस भेजने की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हो पाई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, मंत्री कार्यालयों में कुल 735 अधिकारी-कर्मचारी प्रतिनियुक्ति पर पहुंचे थे। इनमें से करीब 500 कर्मचारियों की वापसी हो चुकी है, जबकि लगभग 235 कर्मचारियों की स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं है।
प्रतिनियुक्ति खत्म करने के निर्देश के बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने मंत्री कार्यालयों में तैनात कर्मचारियों का ब्योरा जुटाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। विभाग की ओर से मंत्रियों के निजी सचिव और विशेष कार्य अधिकारियों से उनके कार्यालयों में तैनात कर्मचारियों की पूरी जानकारी मांगी जा रही है।
आदेश के बाद भी पूरी जानकारी नहीं मिली
सरकार ने 25 अगस्त को प्रतिनियुक्ति पर काम कर रहे कर्मचारियों को उनके मूल विभाग में वापस भेजने का निर्देश दिया था। इसके बाद 3 सितंबर को सभी मंत्री कार्यालयों से कर्मचारियों की स्थिति की जानकारी मांगी गई। इसमें प्रतिनियुक्ति के अलावा मौखिक आदेश के आधार पर मंत्री कार्यालयों में काम कर रहे कर्मचारियों का विवरण भी शामिल था।
हालांकि, निर्धारित समय बीतने के बाद भी कई मंत्री कार्यालयों से पूरी जानकारी नहीं मिल सकी। इसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने दोबारा जानकारी जुटाने की प्रक्रिया शुरू की है, ताकि मंत्री कार्यालयों में अभी भी तैनात कर्मचारियों की वास्तविक संख्या और उनकी नियुक्ति की स्थिति स्पष्ट हो सके।
नियुक्ति की जिम्मेदारी पर उठे सवाल
प्रतिनियुक्ति खत्म करने की प्रक्रिया के बीच जवाबदेही तय करने के तरीके को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। प्रशासन के कुछ अधिकारियों का कहना है कि किसी कर्मचारी को मंत्री कार्यालय में तैनात करने का फैसला केवल निजी सचिव या विशेष कार्य अधिकारी के स्तर पर नहीं होता। इसलिए नियुक्ति की अनुमति देने वाले संबंधित स्तर की भी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
वहीं, कुछ निजी सचिवों और विशेष कार्य अधिकारियों का कहना है कि कर्मचारियों की वापसी को लेकर उनसे जवाब मांगा जा रहा है, जबकि प्रतिनियुक्ति पर नियुक्ति के मूल फैसले में उनकी भूमिका सीमित होती है। उनका तर्क है कि इसी वजह से कर्मचारी भी उनके प्रति नाराजगी जाहिर कर रहे हैं।
अब सामान्य प्रशासन विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती मंत्री कार्यालयों में बचे करीब 235 कर्मचारियों की स्थिति स्पष्ट करना है। इसके बाद इन कर्मचारियों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत उनके मूल विभागों में वापस भेजने की कार्रवाई की जाएगी।
पढ़ने के लिए धन्यवाद
आपका समय और भरोसा हमारे लिए बहुत मायने रखता है। अगर यह खबर आपके लिए उपयोगी रही, तो हमसे जुड़े रहें — हर ज़रूरी खबर के लिए Newsam को फ़ॉलो करें।