राहुल गुप्ता
यवतमाल, 7 अक्टूबर। यवतमाल शहर में भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। ऐसे में आगामी गर्मी में जलसंकट और गंभीर होने की आशंका है। नए कुएं और बोरवेल खोदने के बजाय वर्षों से उपेक्षित पड़े सार्वजनिक कुओं को फिर से उपयोग में लाने का सुझाव सामने आया है। पार्षद भारत पुष्पा दिगंबर ब्राह्मणकर ने जिलाधिकारी विकास मीना को ज्ञापन सौंपकर पुराने कुओं की सफाई, गाद निकासी और मरम्मत कराने की मांग की है।
1 अक्टूबर से नए कुएं-बोरवेल पर रोक
जिलाधिकारी ने 1 अक्टूबर 2026 को नए कुएं और कूपनलिका यानी बोरवेल खोदने पर रोक लगाते हुए उपलब्ध जलस्रोतों के पानी को पेयजल के लिए सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में पुराने सार्वजनिक कुओं को पुनर्जीवित करना कम खर्च में तत्काल लागू किया जा सकने वाला विकल्प हो सकता है।
ब्राह्मणकर ने बताया कि प्रभाग क्रमांक 17 में कुल 7 सार्वजनिक कुएं हैं। इनमें से 5 कुएं मूर्ति विसर्जन, कचरा और अन्य सामग्री डाले जाने के कारण दूषित हो चुके हैं।
सफाई के बाद फिर बन सकते हैं जलस्रोत
ज्ञापन में दावा किया गया है कि इन कुओं के भूगर्भ में प्राकृतिक जलस्रोत यानी जीवित झरने अब भी सक्रिय हैं। यदि कुओं से गाद निकालकर उनकी सफाई, निर्जंतुकीकरण और जरूरी मरम्मत कराई जाए, तो इन्हें दोबारा जलस्रोत के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
इसके लिए ब्राह्मणकर ने नगर परिषद क्षेत्र में मौजूद सभी सार्वजनिक कुओं का तत्काल सर्वेक्षण कराने की मांग की है। साथ ही नियमित रखरखाव की व्यवस्था करने का सुझाव भी दिया है।
टैंकर के खर्च से बेहतर पारंपरिक जलस्रोत
ब्राह्मणकर ने कहा कि जलसंकट का स्थायी समाधान तलाशना जरूरी है। बार-बार टैंकरों पर पैसा खर्च करने के बजाय शहर में मौजूद पारंपरिक जलस्रोतों को पुनर्जीवित करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए। सार्वजनिक कुओं की सफाई, गाद निकासी और मरम्मत के जरिए कम खर्च में गर्मी के संभावित जलसंकट से निपटने में मदद मिल सकती है।
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