शिवसेना के धनुष-बाण पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से गरमाई सियासत, संजय राऊत बोले- सही जगह जाएगा चिन्ह

राहुल गुप्ता

मुंबई, 7 अक्टूबर। शिवसेना के धनुष-बाण चुनाव चिन्ह को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की टिप्पणी ने महाराष्ट्र की सियासत गरमा दी है। उन्होंने शिंदे गुट के वकील नीरज किशन कौल से सवाल किया कि पार्टी के चिन्ह से जुड़ी भावना उन लोगों के पक्ष में होनी चाहिए, जिन पर ‘संवैधानिक पाप’ यानी दल-बदल का आरोप है या उन लोगों के पक्ष में, जिन्होंने इसके खिलाफ शिकायत की है।

ठाकरे गुट के सांसद संजय राऊत ने इस टिप्पणी को बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने उम्मीद जताई कि सुनवाई के बाद धनुष-बाण चुनाव चिन्ह सही जगह जाएगा और मामले में पारदर्शी फैसला आएगा।

‘सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी बेहद महत्वपूर्ण’

संजय राऊत ने कहा कि न्यायमूर्ति बागची ने सुनवाई के दौरान कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि अगर किसी गुट के विधायकों को अयोग्य ठहराया जाता है, तो ऐसे में पार्टी और चुनाव चिन्ह पर उसके दावे का क्या होगा, यह सवाल महत्वपूर्ण है।

सुप्रीम कोर्ट की मौजूदा सुनवाई में शिंदे गुट की ओर से पेश वरिष्ठ वकील नीरज किशन कौल ने चुनाव आयोग द्वारा विधायी बहुमत को आधार मानने का बचाव किया है। अदालत ने इस बात पर भी सवाल उठाया है कि जिन विधायकों की सदस्यता पर अयोग्यता की कार्यवाही चल रही हो, उनकी संख्या को बहुमत का सुरक्षित आधार माना जा सकता है या नहीं।

Advertisement

‘धनुष-बाण किसे मिलना चाहिए?’

राऊत ने कहा कि सवाल यह है कि शिवसेना और धनुष-बाण आखिर किसका है। उन्होंने दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई सही दिशा में आगे बढ़ रही है और उन्हें उम्मीद है कि अंततः उचित पक्ष को चुनाव चिन्ह मिलेगा।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अभी इस मामले में कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। सुनवाई जारी है और शिंदे गुट के वकील की दलीलें पूरी होने के बाद ठाकरे गुट का पक्ष भी सुना जाना है।

आदिवासी छात्रों के आंदोलन पर भी बोले राऊत

संजय राऊत ने आदिवासी छात्रों के आंदोलन को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कई महीनों से नासिक में आंदोलन कर रहे आदिवासी छात्र अपनी मांगों को लेकर मुंबई पहुंचे थे। उनके मुताबिक, रहने की जगह नहीं होने के कारण छात्रों को तिलक भवन में ठहराया गया, लेकिन बाद में उन्हें वहां से हटा दिया गया।

राऊत ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को इन छात्रों से संवाद करना चाहिए था और उनके रहने की उचित व्यवस्था करनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि अगर मुख्यमंत्री खुद को राज्य का अभिभावक मानते हैं तो उन्हें आंदोलन स्थल पर जाकर छात्रों से बात करनी चाहिए।

‘MPSC और आदिवासी छात्रों को साथ आना चाहिए’

राऊत ने MPSC और आदिवासी छात्रों के आंदोलनों को एक साथ जोड़ते हुए कहा कि दोनों को मिलकर अपने अधिकारों के लिए लड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता MPSC छात्रों के आंदोलन में जाकर उनका समर्थन कर चुके हैं और मुख्यमंत्री को भी छात्रों से संवाद करना चाहिए।

उन्होंने रोहित पवार के आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि अगर रोहित पवार आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं तो उन्हें करने दिया जाना चाहिए। राऊत ने आरोप लगाया कि आंदोलन में फूट डालना समाधान नहीं है और सरकार को छात्रों से बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए।

पढ़ने के लिए धन्यवाद

आपका समय और भरोसा हमारे लिए बहुत मायने रखता है। अगर यह खबर आपके लिए उपयोगी रही, तो हमसे जुड़े रहें — हर ज़रूरी खबर के लिए Newsam को फ़ॉलो करें।

Add a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Advertisement
↑
Tap to Refresh