कांजुरमार्ग लैंडफिल और सड़कों पर कचरे को लेकर सुनवाई, बीएमसी के वार्ड अधिकारियों से मांगी जमीन पर सफाई व्यवस्था की विस्तृत रिपोर्ट
राहुल गुप्ता
मुंबई, 8 अक्टूबर।
मुंबई में कचरा प्रबंधन और सफाई व्यवस्था को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को बीएमसी को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि वर्ली, साउथ मुंबई या नरीमन प्वाइंट जैसे कुछ इलाकों की सफाई का मतलब यह नहीं है कि पूरा मुंबई शहर साफ है।
जस्टिस गिरीश एस. कुलकर्णी और जस्टिस नीला के. गोखले की पीठ कांजुरमार्ग लैंडफिल में कचरा निपटान और शहर की सड़कों व समुद्र तटों पर कचरा फेंके जाने से जुड़ी याचिका पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने शहर के कई हिस्सों में गंदगी और कचरा प्रबंधन की स्थिति पर नाराजगी जताई।
अदालत ने कहा कि जब तक व्यवस्था ठीक नहीं होगी और नागरिकों में जागरूकता नहीं आएगी, तब तक सड़कों पर कचरा फेंकने की समस्या बनी रहेगी। पीठ ने कहा कि मुंबई को ऐसा शहर बनाने की जरूरत है जहां लोग खुद कचरा डस्टबिन में डालें। इसके लिए निगरानी, कैमरों और प्रभावी कार्रवाई जैसे उपाय जरूरी बताए गए।
बीएमसी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल साखरे ने दावा किया कि शहर में स्थिति में सुधार हुआ है। हालांकि, हाईकोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक स्थानों, पहाड़ी ढलानों, फुटपाथ और सड़कों से जुड़े स्वास्थ्य एवं स्वच्छता संबंधी समस्याग्रस्त इलाकों में वार्ड अधिकारियों की कार्रवाई में कोई बहुत बड़ी प्रगति नजर नहीं आ रही है।
वार्ड अधिकारियों से मांगी विस्तृत रिपोर्ट
हाईकोर्ट ने बीएमसी से विस्तृत हलफनामा दाखिल करने को कहा है। इसमें वार्ड अधिकारियों की ओर से जमीन पर वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए उठाए गए कदमों और गांधी जयंती के अवसर पर चलाए गए ‘स्वच्छता अभियान’ के तहत की गई कार्रवाई का ब्यौरा देने को कहा गया है।
पीठ ने बताया कि महाराष्ट्र न्यायिक अकादमी, उत्तन जाते समय न्यायाधीशों ने जोगेश्वरी में एक नगर निगम स्कूल के पास प्लास्टिक से ढकी पहाड़ी देखी। इस पर अदालत ने तत्काल सफाई कराने की जरूरत बताई और बीएमसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
हाईकोर्ट ने संकेत दिया कि वह पश्चिमी उपनगरों के कुछ वार्ड अधिकारियों को अगली सुनवाई के दौरान तलब कर सकता है। अदालत ने इन इलाकों में कचरा प्रबंधन से जुड़ी अव्यवस्था का भी जिक्र किया।
कांजुरमार्ग लैंडफिल का फिर निरीक्षण संभव
अदालत ने कांजुरमार्ग कचरा निपटान केंद्र का दोबारा निरीक्षण करने के संकेत भी दिए हैं। इससे पहले भी लैंडफिल से दुर्गंध और प्रदूषण को लेकर हाईकोर्ट में सुनवाई होती रही है।
कांजुरमार्ग से आने वाली दुर्गंध और पर्यावरण प्रदूषण से जुड़ी शिकायतों के समाधान पर अगली सुनवाई 22 अक्टूबर को होगी। कोर्ट ने साफ किया है कि शहर की सफाई व्यवस्था को कुछ चुनिंदा इलाकों तक सीमित रखने के बजाय पूरे मुंबई में प्रभावी तरीके से लागू करने की जरूरत है।
पढ़ने के लिए धन्यवाद
आपका समय और भरोसा हमारे लिए बहुत मायने रखता है। अगर यह खबर आपके लिए उपयोगी रही, तो हमसे जुड़े रहें — हर ज़रूरी खबर के लिए Newsam को फ़ॉलो करें।