अमोल मातेले बोले- मेहनतकश विद्यार्थियों का अपमान बर्दाश्त नहीं; नवनाथ बन को तत्काल माफी मांगनी चाहिए
न्यूज़म ब्यूरो
मुंबई/पुणे, 8 अक्टूबर। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रदेश महासचिव एडवोकेट अमोल मातेले ने भाजपा के मुख्य प्रवक्ता नवनाथ बन के एक कथित बयान को लेकर उन पर निशाना साधा है। मातेले ने आरोप लगाया कि पुणे में अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे MPSC विद्यार्थियों की तुलना ‘गधा’ से करना और उनके संघर्ष को अपमानजनक शब्दों में संबोधित करना महाराष्ट्र के मेहनतकश युवाओं का अपमान है। उन्होंने नवनाथ बन से अपने कथित बयान के लिए तत्काल और बिना शर्त माफी मांगने की मांग की।
विद्यार्थियों के संघर्ष का सम्मान करने की अपील
मातेले ने कहा कि MPSC की तैयारी करने वाले विद्यार्थी अपने परिवार की आर्थिक और व्यक्तिगत कठिनाइयों के बीच दिन-रात मेहनत करते हैं। उन्होंने कहा कि कई विद्यार्थी सीमित संसाधनों में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। ऐसे विद्यार्थियों के संघर्ष का मजाक उड़ाना उचित नहीं है। उन्होंने भाजपा नेताओं से विद्यार्थियों की मेहनत और उनकी मांगों को गंभीरता से लेने की अपील की।
परीक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार पर सवाल
मातेले ने परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर राज्य की महायुति सरकार पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने, परीक्षा की तारीखों को लेकर भ्रम और परिणामों में देरी जैसी समस्याओं के कारण विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ा है। उन्होंने कहा कि इन मुद्दों का समाधान करने के बजाय आंदोलन कर रहे विद्यार्थियों पर टिप्पणी करना उनकी समस्याओं को और बढ़ाता है।
‘गधा’ कहने पर माफी की मांग
मातेले ने कहा कि अपने अधिकारों और मांगों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाने वाले विद्यार्थियों को अपमानित करना स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि राजनीतिक नेताओं को सार्वजनिक जीवन में अपने शब्दों और बयानों की जिम्मेदारी समझनी चाहिए। मातेले ने नवनाथ बन से MPSC विद्यार्थियों और महाराष्ट्र की युवा पीढ़ी से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की।
आंदोलन में विद्यार्थियों के साथ खड़े रहने का दावा
मातेले ने कहा कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) MPSC की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों से जुड़े मुद्दों और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर उनकी पार्टी लोकतांत्रिक तरीके से अपनी भूमिका जारी रखेगी। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि विद्यार्थियों की आवाज को दबाने के बजाय उनकी समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए।
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