धर्मपाल मेश्राम बोले- राजनीतिक मतभेदों के बावजूद महिलाओं के प्रति भाषा की मर्यादा नहीं टूटनी चाहिए
न्यूज़म ब्यूरो
मुंबई 8 अक्टूबर। भारतीय जनता पार्टी की नेता चित्रा वाघ के खिलाफ रोहिणी खडसे द्वारा कथित रूप से की गई आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर भाजपा नेता एडवोकेट धर्मपाल मेश्राम ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर उतरकर किसी महिला के बारे में आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करना उचित नहीं है।
राजनीतिक मतभेदों में भी भाषा की मर्यादा जरूरी
मेश्राम ने कहा कि राजनीति में वैचारिक मतभेद और राजनीतिक संघर्ष होना स्वाभाविक है। किसी नेता की राजनीतिक भूमिका से असहमति होने पर उसका विरोध वैचारिक और सभ्य भाषा में किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक बहस के दौरान भाषा की मर्यादा बनाए रखना जरूरी है।
महिलाओं के सम्मान का मुद्दा उठाया
मेश्राम ने कहा कि चित्रा वाघ लगातार महिलाओं से जुड़े मुद्दों, उनके सम्मान और सामाजिक विषयों पर अपनी भूमिका रखती रही हैं। उन्होंने कहा कि उनकी राजनीतिक विचारधारा या भूमिका का विरोध किया जा सकता है, लेकिन व्यक्तिगत टिप्पणी करते समय महिलाओं के सम्मान का ध्यान रखा जाना चाहिए।
‘महिलाओं के सम्मान की बात करने वालों को आत्ममंथन करना चाहिए’
मेश्राम ने सवाल उठाया कि जो लोग महिलाओं के सम्मान की बात करते हैं, क्या उनके लिए किसी महिला के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल उचित है? उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोध कितना भी तीखा क्यों न हो, महिलाओं के सम्मान और सार्वजनिक संवाद की मर्यादा को नहीं लांघना चाहिए।
संयमित और सम्मानजनक भाषा का आह्वान
मेश्राम ने रोहिणी खडसे के कथित बयान का सार्वजनिक रूप से विरोध करते हुए सार्वजनिक जीवन में संयमित और सम्मानजनक भाषा के इस्तेमाल की अपील की। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेदों को व्यक्तिगत आरोपों और आपत्तिजनक भाषा के बजाय लोकतांत्रिक एवं वैचारिक तरीके से व्यक्त किया जाना चाहिए।
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