एसआईआर के मसौदा रोल में जन्म वर्ष 1900 दर्ज होने से 101 से 150 साल तक दिखाई गई उम्र, चुनाव आयोग ने एक महीने से अधिक समय बाद सुधारी गलती
राहुल गुप्ता
मुंबई, 9 अक्टूबर। महाराष्ट्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान एक तकनीकी गड़बड़ी सामने आई, जिसने चुनावी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए। मसौदा मतदाता सूची में 2,70,313 मतदाताओं का जन्म वर्ष 1900 दर्ज हो गया, जिससे उनकी उम्र 101 से 150 साल के बीच दिखाई देने लगी। इस गड़बड़ी को भारतीय निर्वाचन आयोग ने 6 अक्टूबर को ठीक किया। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने पहली बार 2 सितंबर को इस मामले में जानकारी मांगी थी, लेकिन समस्या दूर होने में एक महीने से अधिक समय लग गया।
नासिक की 3 विधानसभा सीटों पर सबसे ज्यादा असर
इस गड़बड़ी से प्रभावित मतदाताओं में से 2,37,974 यानी करीब 88 प्रतिशत नासिक जिले की तीन विधानसभा सीटों—कलवण (अनुसूचित जनजाति), चांदवड़ और देवळाली (अनुसूचित जाति)—के थे। बाकी 32,339 मतदाता राज्य के अन्य हिस्सों में दर्ज किए गए थे।
जन्मतिथि का रिकॉर्ड मांगने के लिए कई बार लिखा पत्र
राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने यह पता लगाने के लिए निर्वाचन आयोग के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग से जानकारी मांगी कि यह गलती एसआईआर से पहले की मतदाता सूची में भी थी या पुनरीक्षण के दौरान हुई। कार्यालय ने प्री-एसआईआर सूची में दर्ज जन्मतिथि और उम्र के साथ एसआईआर गणना फॉर्म में दर्ज जन्मतिथि का ब्योरा एक्सेल फॉर्मेट में मांगा था।
इस संबंध में 2 सितंबर को पहला पत्र भेजा गया और 8 सितंबर को फिर से जानकारी मांगी गई। रिकॉर्ड नहीं मिलने पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस. चोकलिंगम ने 17 सितंबर को वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त मनीष गर्ग को पत्र लिखकर सूचना प्रौद्योगिकी विभाग को बिना और देरी के जानकारी देने का निर्देश देने का अनुरोध किया।
चोकलिंगम ने पत्र में कहा था कि महाराष्ट्र की विभिन्न विधानसभा सीटों के 2,70,313 मतदाताओं की उम्र एसआईआर-2026 की मसौदा सूची में 101 से 150 वर्ष के बीच दर्ज दिखाई दे रही है। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि बड़ी संख्या में मतदाताओं की उम्र 126 वर्ष दर्ज थी।
लगातार फॉलो-अप के बाद सुधारी गई गलती
द इंडियन एक्सप्रेस ने 5 अक्टूबर की सुबह नई दिल्ली में निर्वाचन आयोग के प्रवक्ता से पूछा कि जानकारी देने में इतनी देर क्यों हुई। सूत्रों के मुताबिक, उसी दिन बाद में मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय को जवाब मिला। इसके बाद लगातार संपर्क किए जाने पर 6 अक्टूबर को सिस्टम के जरिए गड़बड़ी ठीक कर दी गई।
निर्वाचन आयोग के अधिकारियों के अनुसार, प्रभावित रिकॉर्ड में तकनीकी गड़बड़ी के कारण जन्म वर्ष 1900 दर्ज हो गया था। इसे सिस्टम के माध्यम से सुधार दिया गया।
मतदाता सूची के आंकड़ों पर केंद्रीकरण को लेकर सवाल
यह मामला इस बात को भी उजागर करता है कि महाराष्ट्र के मतदाताओं के रिकॉर्ड हासिल करने के लिए राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय को निर्वाचन आयोग के केंद्रीय मुख्यालय पर निर्भर रहना पड़ा। आयोग के भीतर भी मतदाता सूची के आंकड़ों तक पहुंच और उनके केंद्रीकरण को लेकर चिंताएं सामने आ चुकी हैं।
द इंडियन एक्सप्रेस की एक जांच रिपोर्ट के अनुसार, दो निर्वाचन आयुक्तों ने ईसीआईनेट को लेकर आपत्तियां जताई थीं। सुखबीर सिंह संधू ने कहा था कि कानून के तहत मतदाता सूची में बदलाव करने के अधिकार रखने वाले मुख्य निर्वाचन अधिकारी, जिला निर्वाचन अधिकारी और निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों को ईआरओनेट पोर्टल पर उचित और पूर्ण पहुंच नहीं थी। वहीं, विवेक जोशी ने इसे मतदाता सूची के डेटाबेस के धीरे-धीरे केंद्रीकृत होने की प्रक्रिया बताया था।
महाराष्ट्र में 7.72 करोड़ मतदाता, 16 नवंबर को आएगी अंतिम सूची
महाराष्ट्र में 31 अगस्त को प्रकाशित एसआईआर की मसौदा मतदाता सूची में 7.72 करोड़ मतदाता दर्ज थे। एसआईआर से पहले यह संख्या 9.79 करोड़ थी। मसौदा सूची पर दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तारीख 12 अक्टूबर है, जबकि अंतिम मतदाता सूची 16 नवंबर को प्रकाशित की जाएगी।
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